राजकुमार मल
भाटापारा- कमजोर उत्पादन+ तेज कीमत+ सख्त जांच= संकट में आ चुका है लाई और मुरमुरा का नियमित उत्पादन। फलत: परिचालन से बाहर जा सकती हैं यह दोनों खाद्य सामग्री बनाने वाली ईकाइयां।
चावल और पोहा के बाद अब मुरमुरा और लाई उत्पादन करने वाली इकाइयों पर तालाबंदी का खतरा मंडराने लगा है क्योंकि आधार और ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता से मुरमुरा और लाई क्वालिटी के सफरी और महामाया धान की फसल लेने वाले किसानों ने भी मंडी प्रांगण से दूरी बनानी चालू कर दी है।

कमजोर है आवक, तेज है कीमत
सफरी धान के चावल से बनता है मुरमुरा। महामाया धान की क्वालिटी चावल से बनाई जाती है लाई। दोनों प्रजातियों की आवक बेहद कमजोर हो चली है क्योंकि रास्ते में होने वाली जांच और मंडी प्रांगण में आधार कार्ड और ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता से किसान बेहद परेशान हो चले हैं। फलतः तेजी के बीच खरीदी के लिए विवश हैं मुरमुरा और लाई बनाने वाली इकाइयां। यह तब, जब तैयार उत्पादन के भाव और मांग स्थिर हैं।
संकट में यह चावल मिलें
कमजोर आवक और तेज कीमत जैसी स्थितियों का सामना कर रहीं मुरमुरा और लाई क्वालिटी का चावल बनाने वाली इकाइयां भी संकट में आ चुकीं हैं क्योंकि खरीदी, परिवहन, भंडारण और तैयार उत्पादन के विक्रय तक का हर चरण सख्त जांच के घेरे में है। इसलिए परिचालन की समयावधि घटाने जैसे उपाय पर विचार किया जा रहा है।

गंभीर हैं इस पर
तकनीक के दौर में चावल, लाई और मुरमुरा उत्पादन के लिए नई सुविधाओं से लैस मशीनें आ गई हैं लेकिन फिर भी जरूरी है श्रमिकों का होना। परिचालन बंद करने का फैसला ईकाइयों में कार्यरत श्रमिक और श्रमिक परिवार पर गहरा असर डाल सकता है। इसलिए गंभीरता के साथ ‘ वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं इकाइयां।
कर रहे बेहतर की प्रतीक्षा
कमजोर आवक, तेज भाव और तैयार उत्पादन की स्थिर मांग के अलावा सख्त जांच जैसी स्थितियों के बीच अच्छे दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
-रंजीत दावानी, अध्यक्ष, पोहा-मुरमुरा उत्पादक कल्याण समिति, भाटापारा