छूटे सड़क पर किया गया घटिया डामरीकरण बजरी सड़क पर निकली, नगरपालिका व ठेकेदार की लापरवाही उजागर, सवा दो वर्षों बाद भी गौरव पथ अधूरा ।


दिलीप गुप्ता
सरायपाली :
सरायपाली नगर में निर्माणाधीन गौरवपथ का निर्माण सवा दो वर्षों बाद भी अधूरा है । कार्य की गुणवत्ता व धीमे कार्य को लेकर हमेशा नगरपालिका व ठेकेदार पर उंगलियां उठती रही है ।18 माह में पूर्ण किए जाने के टाइमलाइन के व्यतीत हो जाने व लगभ 26 महीने निकल जाने के बावजूद गौरवपथ का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है । वहीं अग्रसेन व जयस्तंभ चौक के पास नाली निर्माण के लिए छोड़े गए स्थान को डामरीकरण किया तो गया है पर वह निहायत ही गुणवत्ताविहीन कार्य कर दिया गया है अभी भी किए गए डामरीकरण के बाद प्रयुक्त बजरी बाहर सड़क पर फैलने से गिरने व फिसलने का भय हमेशा बना रहता है ।
ज्ञातव्य हो कि गौरवपथ का निर्माण सवा दो वर्ष व्यतीत हो जाने के बावजूद लगभग 25 – 30 प्रतिशत कार्य होना शेष है । कुछ डिवाइडरों में स्ट्रीटलाइट पोल , पौधारोपण , डिवाइडर में ग्रिल निर्माण , नालियों की अन्दर व बाहर से सफाई , डिवाइडर में जेब्रा टाइप कलर , अधूरी व टूटी फूटी नालियों की मरम्मत , सहायक नाली के साथ ही सबसे महत्वपूर्ण कार्य सर्विस रोड का निर्माण कार्य होना शेष है । विधानसभा में नगरीय प्रशासन मंत्री द्वारा विधायक के प्रश्नों पर उत्तर देते हुवे बताया गया कि ठेकेदार को 99 प्रतिशत का भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई इस तरह कुल स्वीकृत लागत के हिसाब से लगभग 40 लाख रुपए ही ठेकेदार को भुगतान होना शेष है जबकि शेष कार्य इतनी बचत लागत में पूर्ण हो पाएगा यह संशय का विषय है ।
नगरपालिका व ठेकेदार नैला निवासी मेसर्स रामनिवास अग्रवाल के मध्य 6/10/2023 को अनुबंध क्रमांक 855 के तहत अनुबंध किया गया था । 6.5 किलोमीटर बनने वाले गौरवपथ का निर्माण अनुबंध के बाद से ही पूर्व नपाध्यक्ष अमृत अप्रैल के द्वारा भूमिपूजन कर प्रारंभ कर दिया गया था । गौरवपथ निर्माण पूर्ण किए जाने की तय सीमा 18 माह निर्धारित की गई थी । यह गौरवपथ 18 माह में बनकर तैयार हो जाना था किंतु दुखद की आज 26 महीनों बाद भी गौरवपथ का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका है ।
अभी कुछ दिनों पूर्व ही ठेकेदार द्वारा गणपति वॉच से सियाराम शोरूम तक बाएं तरफ का कुछ चौड़ा हिस्सा तथा सलूजा वस्त्रालय से जयस्तंभ चौक तक हिस्सा डामरीकरण किए जाने हेतु शेष था उसे अभी किया है । इस किए गए अधूरे कार्य का डामरीकरण का कार्य बहुत ही स्तरहीन है । जगह जगह डामरीकरण में प्रयुक्त होने वाले बजरी बाहर आ गई है । यदि इस पर बारीक बजरी का एक और लेयर लगाना है तो उसे शीघ्र ही लगाना चाहिए । वहीं इसी स्थान पर जितेंद्र खोडियार के घर से जयस्तंभ चौक तक बगैर नाली निर्माण किए डामरीकरण के दिए जाने से अब यहां नाली बनेगी भी या नहीं यह भी प्रश्नचिन्ह खड़े हो गया है । यदि नाली नहीं बनी तो जितेंद्र खोडियार के घर तक बनाई गई नाली का पानी अब कहा निकाला जायेगा ?यह भी विचारणीय है ।

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