रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती का मुद्दा अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लगातार अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है, जबकि सरकार ने आरोपों को नकारते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। पिछले 17 दिनों में अफीम की खेती के 5 मामले सामने आने के बाद यह मुद्दा अब विधानसभा के बजट सत्र से लेकर सोशल मीडिया तक गूंज रहा है।
प्रदेश में फैलता अफीम की खेती का नेटवर्क
छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में जिस तरह अलग-अलग जिलों में अफीम की खेती पकड़ी गई है, उसने प्रशासन और राजनीति दोनों को सतर्क कर दिया है। पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई में अब तक दुर्ग, बलरामपुर और रायगढ़ जिलों में अफीम की अवैध खेती के मामले सामने आ चुके हैं।
ताजा मामला रायगढ़ जिले के लैलूंगा ब्लॉक के नवीन घट गांव से सामने आया, जहां तीन अलग-अलग खेतों में अफीम की खेती मिलने की पुष्टि हुई। इससे पहले तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में भी अफीम की खेती पकड़ी गई थी।
भाजपा नेता के खेत से जुड़े आरोप
अफीम की खेती मिलने के बाद विपक्ष ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में भाजपा नेताओं से जुड़े खेतों में भी अफीम की खेती होने की जानकारी सामने आई है। विपक्ष का कहना है कि यदि यह सच है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

विपक्ष का आरोप: भाजपा नेताओं के संरक्षण में चल रहा नेटवर्क
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में अफीम की खेती राजनीतिक संरक्षण में हो रही है। विपक्ष का कहना है कि अगर इतने कम समय में अलग-अलग जिलों में लगातार मामले सामने आ रहे हैं तो यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा कि “सुशासन के ‘अफीम स्टार्टअप’ की नई ब्रांच लैलूंगा में खुल गई है।” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा को अपना चुनाव चिन्ह कमल के फूल की जगह अफीम का फूल कर लेना चाहिए।

सरकार का जवाब: आरोप बेबुनियाद
विपक्ष के आरोपों को भाजपा नेताओं ने सिरे से खारिज कर दिया है। वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि अफीम की खेती का मामला गंभीर है और इसमें शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसे राजनीतिक रंग देना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि “भूपेश बघेल की राजनीति हमेशा चर्चा में बने रहने की रही है। किसी भी तरह का बयान देकर चर्चा में रहने की कोशिश की जाती है। तथ्यों की जांच के आधार पर ही कार्रवाई होनी चाहिए।”
सरकार का आश्वासन: दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार और प्रशासन का कहना है कि अफीम की अवैध खेती किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिन-जिन जगहों पर खेती मिली है वहां मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने यह भी कहा है कि अगर किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण सामने आता है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।
17 दिनों में कहां-कहां पकड़ी गई अफीम की खेती
प्रदेश में मार्च महीने के दौरान कई जगहों पर अफीम की खेती का खुलासा हुआ है—
- 7 मार्च – दुर्ग जिला
- 10 मार्च – बलरामपुर (कुसमी)
- 12 मार्च – बलरामपुर (कोरंधा)
- 21 मार्च – रायगढ़ (तमनार)
- 23 मार्च – रायगढ़ (लैलूंगा)
इन मामलों के बाद यह साफ हो गया है कि प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में अफीम की खेती का नेटवर्क फैलने की आशंका है।
विधानसभा के बजट सत्र में भी उठा मुद्दा
अफीम की खेती का मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में भी गूंजा। विपक्षी विधायकों ने सरकार से सवाल किया कि आखिर इतने कम समय में लगातार मामले कैसे सामने आ रहे हैं और इसके पीछे कौन लोग हैं।
विपक्ष ने सरकार से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है, वहीं सरकार ने कहा है कि प्रशासन पहले से ही कार्रवाई कर रहा है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीति बनाम कानून-व्यवस्था
अफीम की खेती के मामलों ने अब छत्तीसगढ़ की राजनीति को भी गरमा दिया है। विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कार्रवाई होना ही इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन सक्रिय है। आने वाले दिनों में जांच और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गर्मा सकता है।