म्युल अकाउंट के जरिए ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़, तीन अंतर्राज्यीय आरोपी गिरफ्तार

81 एटीएम कार्ड, 62 बैंक पासबुक, 13 मोबाइल और लैपटॉप बरामद; आईपीएल सीजन में रांची से संचालित हो रहा था नेटवर्क

रमेश गुप्ता
भिलाई। दुर्ग पुलिस ने ऑनलाइन जुआ-सट्टा और अवैध वित्तीय लेन-देन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए म्युल अकाउंट के जरिए संचालित एक अंतर्राज्यीय सट्टा नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। थाना खुर्सीपार पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की संयुक्त टीम ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 81 एटीएम कार्ड, 62 बैंक पासबुक, 5 चेकबुक, 13 मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, एक लैपटॉप और हार्ड डिस्क सहित लगभग ढाई लाख रुपये की सामग्री जब्त की है।
एडिशनल एसपी एवं पुलिस प्रवक्ता मणिशंकर चंद्रा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि आरोपियों द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। बाद में पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड अपने कब्जे में लेकर इन खातों का उपयोग ऑनलाइन सट्टे और अवैध वित्तीय लेन-देन के लिए किया जाता था।
मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई
पुलिस को सूचना मिली थी कि खुर्सीपार स्थित आईटीआई खेल मैदान के पास पुलिस ने
अजय मिश्रा (23 वर्ष), निवासी सेक्टर-1, एवेन्यू-सी, भिलाई
दीपक कुमार (32 वर्ष), निवासी नगदोई, जिला नालंदा (बिहार)
करण कुमार सिंह (26 वर्ष), निवासी बालाजी नगर, खुर्सीपार निवासी
कुछ युवक लैपटॉप और मोबाइल फोन के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही संदिग्धों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया।
तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरण बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने ऑनलाइन सट्टा संचालन और अवैध लेन-देन में संलिप्तता स्वीकार की।
“अन्ना रेड्डी” एप के जरिए चलता था कारोबार
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी “अन्ना रेड्डी” ऑनलाइन बेटिंग एप्लीकेशन के माध्यम से सट्टा कारोबार संचालित करते थे। आईपीएल सीजन के दौरान यह नेटवर्क झारखंड के रांची से संचालित किया गया। सट्टे से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर वित्तीय गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, अलग-अलग बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल उपकरणों का उपयोग कर पैसों के प्रवाह को छिपाया जाता था ताकि वास्तविक संचालकों तक पहुंचना मुश्किल हो।
ऐसे काम करते थे म्युल अकाउंट
विवेचना में खुलासा हुआ कि आरोपी जरूरतमंद लोगों को कुछ राशि देने का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के बाद संबंधित व्यक्ति से एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और मोबाइल सिम ले लिए जाते थे। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को “म्युल अकाउंट” कहा जाता है।
इन्हीं खातों के जरिए ऑनलाइन सट्टे की रकम का ट्रांसफर, निकासी और लेयरिंग की जाती थी, जिससे धन के स्रोत और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपी रहे।
कई धाराओं में मामला दर्ज
आरोपियों के खिलाफ थाना खुर्सीपार में अपराध क्रमांक 236/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3), 318(4), 319 तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 5, 6 और 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक या मोबाइल सिम उपयोग के लिए न दें। ऐसे दस्तावेज साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टा, वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

क्या होता है म्युल अकाउंट?
म्युल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग अपराधी अवैध धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने, ट्रांजेक्शन की असली पहचान छिपाने और जांच एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए करते हैं। अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर ऐसे खाते खुलवाए जाते हैं। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को ऐसे प्रलोभनों से बचने की सलाह देते हैं।

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