रायपुर में नीति आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला: ड्रॉपआउट कम करने और युवाओं को कौशल से जोड़ने पर जोर, मंत्री चौधरी ने कहा – “यह विकसित भारत के सपने को साकार करेगा”

रायपुर। नीति आयोग ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में “Fostering Mentorship in Education: A Pathway to Equity” विषय पर राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करना है, जो शिक्षा को अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और कौशल-उन्मुख बनाए।

मेंटॉरशिप युवाओं की सफलता की कुंजी – ओपी चौधरी

विशेष अतिथि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मेंटरशिप शिक्षा में समानता और सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि भारत की औसत आयु 28 वर्ष और छत्तीसगढ़ की 24 वर्ष है, जो राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। “हमें युवाओं को रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा, ताकि वे विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकें,” उन्होंने कहा।

ड्रॉपआउट दर चिंता का विषय – डॉ. वी. के. पॉल

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने बताया कि प्राथमिक शिक्षा में नामांकन 93% है, लेकिन सेकेंडरी स्तर तक यह घटकर 56% और 12वीं में 23% रह जाता है। 2019-2023 के बीच केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 15,000 और आईआईटी व आईआईएम से 4,000 से अधिक छात्रों ने पढ़ाई छोड़ी। उन्होंने कहा, “हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका अधिकार है। यह आत्मविश्वास, जीवन कौशल और सही मार्गदर्शन देने का सबसे प्रभावी तरीका है।”

उपस्थित रहे कई वरिष्ठ अधिकारी

कार्यशाला में योजना विभाग के सचिव अंकित आनंद, संयुक्त सचिव के. एस. रेजिमोन, प्रो. पंकज अरोड़ा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

यह पहल शिक्षा में समानता, कौशल विकास और भविष्य की पीढ़ी को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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