छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लंबे समय से चले आ रहे नक्सलवाद के प्रभाव में बड़ी कमी का दावा करते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण सफलता बताया है। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त रणनीति और सुरक्षा बलों की सक्रियता से अब बस्तर का अधिकांश इलाका मुख्यधारा से जुड़ चुका है और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।
रायपुर के प्रेस क्लब रायपुर में आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में शामिल हुए डिप्टी सीएम ने 31 मार्च 2026 को नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने बस्तर की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि क्षेत्र अब तेजी से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बस्तर के लगभग नक्सलमुक्त होने का दावा दोहराया।

उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सल प्रभाव कम होना सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे अब दूरस्थ इलाकों तक सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार आसान होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
पुनर्वास और विकास की रणनीति
विजय शर्मा ने बताया कि सरकार ने ‘सरेंडर’ जैसे शब्दों की बजाय ‘पुनर्वास’ पर जोर दिया, जिससे प्रभावित लोगों में भरोसा बढ़ा। पिछले दो वर्षों में करीब 3000 लोगों को पुनर्वासित किया गया है और लगभग 95% पूर्व नक्सली अब सामान्य जीवन में लौट चुके हैं। अक्टूबर 2025 में एक ही दिन 210 लोगों का आत्मसमर्पण इस नीति की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि नारायणपुर और सुकमा जैसे संवेदनशील इलाकों में भी हालात अब काफी हद तक नियंत्रण में हैं। बस्तर के युवाओं पर शहरी विकास का प्रभाव पड़ा है, जिससे उनमें अपने क्षेत्र को आगे बढ़ाने की सोच विकसित हुई है। आकाशवाणी पर गोंडी भाषा में प्रसारित कार्यक्रमों और पुनर्वासित युवाओं की कहानियों ने भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है।

आगे की चुनौतियां और सतर्कता
डिप्टी सीएम ने चेतावनी दी कि जंगलों में अभी भी लैंड माइंस का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए अगले एक साल तक विशेष सावधानी जरूरी होगी। उन्होंने ‘अर्बन नक्सल’ नेटवर्क पर भी सख्त रुख अपनाने की बात कही और स्पष्ट किया कि यदि कोई फिर से हथियार उठाता है, तो सुरक्षा बल कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
सरकार जल्द ही बस्तर में विकास और नक्सल उन्मूलन से जुड़े अंतिम आंकड़े सार्वजनिक करने की तैयारी में है। साथ ही पेसा कानून को प्रभावी ढंग से लागू कर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, बस्तर अब एक नए दौर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां सुरक्षा के साथ-साथ विकास और विश्वास की नई नींव रखी जा रही है।