झारखंड-बिहार पुलिस ने नक्सली कमांडर ठेगन मियां की गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज किया

Fierce encounter between Naxalites :

रांची। झारखंड और बिहार पुलिस प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी (CPI-Maoist) के खूंखार कमांडर ठेगन मियां की गिरफ्तारी के लिए संयुक्त अभियान चला रही है। ठेगन मियां, जो पलामू जिले के मोहम्मदगंज थाना क्षेत्र के घंघरी गांव का निवासी है, ऑटोमेटिक हथियार लेकर चलता है और माओवादी संगठन में एक शीर्ष कमांडर है। वह झारखंड-बिहार सीमा पर सक्रिय तीन टॉप नक्सलियों में से एक है।

नक्सली हमलों में शामिल ठेगन मियां पर है कई गंभीर आरोप
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ठेगन मियां पर पलामू जिले में आधा दर्जन से अधिक नक्सली हमलों का आरोप है। वह 15 लाख रुपये के इनामी नक्सली नितेश यादव के दस्ते में कमांडर के रूप में कार्यरत है। पलामू पुलिस अब ठेगन मियां की गिरफ्तारी में मदद के लिए उसे इनाम घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर रही है।

नक्सलियों के आत्मसमर्पण की अपील
पलामू की एसपी रीष्मा रमेशन ने कहा कि पुलिस नक्सलियों से लगातार आत्मसमर्पण करने की अपील कर रही है और इस उद्देश्य से अभियान भी चलाए जा रहे हैं। ठेगन मियां सन 2018 के बाद माओवादी दस्ते में शामिल हुआ था। उसकी पहली पहचान पलामू के छतरपुर थाना क्षेत्र में महूदंड रोड पर हुई आगजनी की घटना से हुई थी। इसके बाद वह कई अन्य नक्सली वारदातों में भी शामिल रहा।

पुलिस के अनुसार, 2025 में पुलिस और माओवादी दस्ते के बीच हुई एक मुठभेड़ में एरिया कमांडर तुलसी भुईयां मारा गया था, जिसमें ठेगन मियां भी शामिल था।

चाईबासा पुलिस ने दो माओवादी गिरफ्तार किए
इस बीच, चाईबासा पुलिस ने भी प्रतिबंधित माओवादी संगठन के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के बाद, पुलिस अब सन 2018 से फरार चल रहे माओवादी शंभु यादव की तलाश में जुटी है। वह माओवादी दस्ते का टेक्निकल एक्सपर्ट सदस्य था।

नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी
पुलिस का मानना है कि ठेगन मियां जैसे खतरनाक नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखने से सीमावर्ती इलाकों में शांति व्यवस्था बनी रहेगी। पुलिस का कहना है कि ठेगन मियां के खिलाफ इनाम घोषित होने से उसे पकड़ने में मदद मिल सकती है, और इससे उसे लेकर महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होने की उम्मीद है।

पुलिस के अनुसार, नक्सली अब जंगलों से बाहर निकलने और पैसे लेकर फरार होने की कोशिशें कर रहे हैं, जिससे झारखंड और बिहार पुलिस की कार्रवाई और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

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