राजकुमार मल
भाटापारा-‘खैर’ को पसंद है हीट वेव। खूब भाती है बंजर धरती। अनियमित बारिश वाले क्षेत्रों के लिए तो वरदान है यह वृक्ष। पौधारोपण के लिए बन रही सूची में खैर का भी नाम शामिल करने का प्रयास इसलिए वानिकी वैज्ञानिक कर रहे हैं क्योंकि शुष्क क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाती है यह प्रजाति।
शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्र के लिए बहुउद्देशीय गुणों वाला ‘खैर’ अब एक बार फिर से वानिकी वैज्ञानिकों का ध्यान खींच रहा है क्योंकि खैर बदलते जलवायु परिवर्तन के बीच बढ़ते हीट वेव के दिन और बढ़ती अनियमित बारिश जैसी स्थितियों के बीच बेहतर परिणाम देने में सक्षम है। छत्तीसगढ़ के लिए अहम इसलिए माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में तेज धूप, तीव्र गर्मी, अनियमित बारिश और भूमि क्षरण जैसी स्थितियां अब स्थाई बन चुकी है।

पसंद है हीट वेव और बंजर धरती
45 डिग्री सेल्सियस तापमान और लगातार हीट वेव जैसे मौसम में जोरदार बढ़वार लेता है खैर। 800 से 1200 मिमी बारिश जैसी वर्षा इसे चाहिए। बंजर धरती इस प्रजाति को इसलिए पसंद है क्योंकि फैलाव के लिए भरपूर जगह मिलती है। यही गुण इसे मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचाने वाले माने जा रहे हैं क्योंकि प्रदेश में ऐसे क्षेत्र अब तेजी से विस्तार ले रहे हैं।
बढ़ाता है हरित आवरण
800 से 1200 मिमी बारिश और 45 डिग्री सेल्सियस तापमान सहनशील खैर ऐसे मैदानी क्षेत्र के लिए भी विशेष तौर पर उपयोगी माना जा रहा है, जहां हरियाली तेजी से घट रही है और नए वन तैयार करने में कठिनाई आ रही है। खैर का वृक्ष ऐसे क्षेत्र के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है, जहां खेती जोखिम पूर्ण रही है।
है आर्थिक महत्व
खैर की लकड़ी से कत्था बनाया जाता है। जिसका उपयोग पान मसाला कारोबारी करते हैं। छाल में होता है टैनिन, जो चमड़ा उद्योग में उपयोग किया जाता है। बेहद कठोर होती है इसकी लकड़ी। इसलिए कृषि उपकरण और फर्नीचर बनाने वाली ईकाइयां अच्छी कीमत देकर खैर की लकड़ियां खरीदतीं हैं।इसके अलावा छाल की खरीदी ऐसी औषधि निर्माण ईकाइयां भी करतीं हैं जो पेचिश,दांत, मसूड़े और त्वचा रोग खत्म करने वाली दवाइयां बनातीं हैं।

खैर: एक सशक्त वानिकी विकल्प
खैर एक जलवायु-अनुकूल प्रजाति है, जो हीट वेव और अनियमित वर्षा जैसी वर्तमान परिस्थितियों में भी स्थिर वृद्धि बनाए रखती है। छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों में, जहां भूमि क्षरण और जलवायु जोखिम बढ़ रहे हैं, वहां खैर का बड़े पैमाने पर रोपण न केवल हरित आवरण बढ़ाएगा, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी प्रदान कर सकता है।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर