भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने स्पष्ट किया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से कोई टोल वसूल नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार से इस तथ्य की पुष्टि की जा सकती है। फतहली ने भरोसा दिलाया कि ईरान भविष्य में भी भारतीय जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से सुरक्षित निकालने में पूरी मदद करेगा। ईरान के विदेश मंत्री ने भारत को अपने पांच सबसे भरोसेमंद मित्र देशों में शामिल बताया है।
भारत सरकार ने भी उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें जहाजों की आवाजाही के लिए टोल देने की बात कही जा रही थी। युद्ध के कारण उपजे तनाव के बीच भारत के 9 एलपीजी जहाज पहले ही इस रास्ते से सुरक्षित निकल चुके हैं, जबकि करीब 15 जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में मौजूद हैं। भारत के लिए यह रास्ता सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का लगभग आधा कच्चा तेल और एलपीजी इसी मार्ग से आता है।
राजदूत फतहली ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के अधिकार की बात दोहराते हुए कहा कि युद्ध के बाद पैदा हुई स्थितियों के लिए अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि ईरान कूटनीति में विश्वास रखता है, लेकिन पुराने अनुभवों के कारण अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकता। यदि अमेरिका अपनी अवैध मांगें छोड़कर ईरान की शर्तें मानता है, तो तेहरान बातचीत के लिए तैयार है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की तेल बिक्री रोकने के लिए होर्मुज में नाकेबंदी की घोषणा की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को रोकना है, जबकि अन्य देशों के जहाजों की सामान्य आवाजाही को बाधित नहीं किया जाएगा। इस बीच ईरान ने संकट की इस घड़ी में एक भरोसेमंद साथी के रूप में साथ देने के लिए भारत का आभार व्यक्त किया है।
