ईरान ने अमेरिकी ए-10 विमान को मार गिराने का किया दावा, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा- हम अब युद्ध की स्थिति में हैं

तेहरान/वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में चल रहा सैन्य संघर्ष अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी वायुसेना के ए-10 थंडरबोल्ट विमान को मार गिराया है। एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा अवसर है जब ईरान ने अमेरिकी सैन्य विमान को निशाना बनाने की बात कही है। इससे पहले एक एफ-15 फाइटर जेट को भी गिराने का दावा किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा हालात पूरी तरह युद्ध की स्थिति जैसे हैं।

विमान क्रैश होने से पहले सुरक्षित निकला पायलट रिपोर्ट के अनुसार, हमले के बाद ए-10 थंडरबोल्ट के पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए विमान को कुवैत के हवाई क्षेत्र की ओर मोड़ दिया। विमान कुवैत की सीमा में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, लेकिन पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा। ईरानी सेना ने अल जजीरा के माध्यम से इस हमले की पुष्टि की है। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी सेना पहले से ही अपने लापता चालक दल के सदस्यों के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही थी।

रेस्क्यू मिशन पर भी हमले की खबर ईरान की आक्रामकता अब बचाव कार्यों तक भी फैल गई है। बताया जा रहा है कि लापता सदस्यों की तलाश में जुटे दो यूएच-60 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया गया है। इस हमले में कुछ सदस्यों को मामूली चोटें आई हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर सभी को सुरक्षित बताया गया है। इससे पहले दुर्घटनाग्रस्त हुए एफ-15 फाइटर जेट के दो सदस्यों में से अब तक केवल एक को ही बचाया जा सका है, जबकि दूसरे की तलाश अभी भी जारी है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर संकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का मुख्य केंद्र है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में दोटूक कहा कि यह युद्ध है और हम युद्ध की स्थिति में हैं। इस सैन्य टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी एलपीजी और कच्चे तेल की बड़ी आपूर्ति के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है। आपूर्ति बाधित होने से घरेलू स्तर पर ईंधन की कमी और महंगाई बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

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