रमेश गुप्ता
दुर्ग। सुरशासन तिहार 2026 के दौरान ग्रामीणों द्वारा उठाई गई पेयजल और सिंचाई संबंधी समस्याओं पर जल संसाधन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने धमधा क्षेत्र के 11 गांवों में स्थायी जल संरचनाओं के निर्माण की दिशा में पहल करते हुए स्थल निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण कराने का निर्णय लिया है। प्रस्ताव उपयुक्त पाए जाने पर इन्हें वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल कराने के लिए उच्च कार्यालय को भेजा जाएगा।
गिरते भू-जल स्तर से बढ़ी किसानों की चिंता
धमधा क्षेत्र में लगातार गिरते भू-जल स्तर ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विभिन्न सर्वे रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्र के अधिकांश बोरवेल लगातार सूख रहे हैं, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। यहां सिंचाई का प्रमुख साधन भूमिगत जल ही है। ऐसे में किसानों ने कलेक्टर अभिजीत सिंह को ज्ञापन देकर जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन के लिए स्थायी समाधान की मांग शासन से की थी।
‘धमधा समेकित जल संवर्धन एवं सिंचाई विकास परियोजना’ पर फोकस
जल संसाधन विभाग ने धमधा समेकित जल संवर्धन एवं सिंचाई विकास परियोजना के तहत रहटादाह, डगनिया, मोतिमपुर, धमधा, गोबरा, पेंड्री, नवागांव, सिरना भाटा, देवरी, भरनी और नंदवाय गांवों में जल संरचनाओं की संभावनाओं का अध्ययन करने की तैयारी की है। परियोजना का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल स्तर में वृद्धि, शिवनाथ नदी एवं टेंगना नाला के जल का वैज्ञानिक उपयोग तथा लगभग 500 से 700 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
पहले तकनीकी सर्वे, फिर बनेगा विस्तृत प्रस्ताव
जल संसाधन उपसंभाग, धमधा के अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सभी प्रस्तावित स्थलों का तकनीकी निरीक्षण कर उनकी व्यवहार्यता का परीक्षण किया जाएगा। यदि परियोजनाएं तकनीकी मानकों पर खरी उतरती हैं, तो उन्हें आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में शामिल कराने के लिए उच्च कार्यालय को अनुशंसा भेजी जाएगी।
पेयजल के साथ सिंचाई व्यवस्था भी होगी मजबूत
प्रस्तावित जल संरचनाओं के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता में सुधार होने के साथ-साथ सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी होगा। इससे किसानों को रबी फसलों का रकबा बढ़ाने, सिंचाई लागत कम करने और कृषि उत्पादन में वृद्धि का लाभ मिलने की उम्मीद है। जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण की दिशा में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुरशासन तिहार में उठी मांगों पर शुरू हुई कार्रवाई
सुरशासन तिहार के दौरान ग्रामीणों ने जल संकट और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की मांग प्रमुखता से उठाई थी। विभाग द्वारा अब इन मांगों पर तकनीकी प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्पष्ट है कि प्राप्त आवेदनों को केवल दर्ज नहीं किया गया, बल्कि उन्हें योजनाओं में शामिल करने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है।
शासन की स्वीकृति मिलने पर मिलेगा स्थायी समाधान
जल संसाधन विभाग ने प्रस्तावों की प्रति कार्यपालन अभियंता, तांदुला जल संसाधन संभाग, दुर्ग को भी भेजी है। तकनीकी परीक्षण और प्रशासनिक स्वीकृति के बाद यदि इन परियोजनाओं को शासन से मंजूरी मिलती है, तो धमधा क्षेत्र के गांवों में वर्षों से बनी जल संकट और सिंचाई की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।