इंदौर जल संकट का इतिहास: स्वच्छ शहर की छवि पर दाग, जानें एक नजर में…

इंदौर को लगातार आठ साल तक देश का सबसे स्वच्छ शहर का खिताब मिला है, लेकिन जल संकट और दूषित पानी की घटनाएं इसकी छवि पर सवाल उठाती रही हैं। शहर की मुख्य जल आपूर्ति नर्मदा नदी से होती है, जिसकी पाइपलाइन प्रणाली में रखरखाव की कमी और लीकेज प्रमुख समस्याएं रही हैं।

1960-70 के दशक: ऐतिहासिक जल संकट और नर्मदा आंदोलन

1966 की गर्मियों में इंदौर ने गंभीर जल संकट झेला। 5 जुलाई 1970 से 23 अगस्त 1970 तक चले आंदोलन में शहरवासियों ने नर्मदा जल लाने की मांग की। यह आंदोलन सफल रहा और नर्मदा प्रोजेक्ट से पानी की आपूर्ति शुरू हुई।

1990 के दशक: सुभाष चौक में सड़ी लाश वाली घटना

लगभग 30 वर्ष पहले सुभाष चौक क्षेत्र में पानी की टंकी में सड़ी लाश का कंकाल मिला। दूषित पानी सप्लाई होने से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े, लेकिन मौतें नहीं हुईं। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बनी।

2023: क्लर्क कॉलोनी और सुभाष नगर में हैजा प्रकोप

जुलाई 2023 में क्लर्क कॉलोनी और सुभाष नगर में दूषित पानी से हैजा फैला। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए।

2025-2026: भागीरथपुरा में सबसे बड़ा संकट

दिसंबर 2025 के अंत में भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा पाइपलाइन में लीकेज से सीवेज पानी मिल गया। शौचालय के ऊपर पाइपलाइन होने और रखरखाव की कमी से दूषित पानी सप्लाई हुआ। इससे डायरिया प्रकोप फैला, 10-15 मौतें हुईं (सरकारी आंकड़ा 4-10, स्थानीय दावा 15), 1400 से अधिक लोग बीमार पड़े। लैब रिपोर्ट में बैक्टीरियल कंटामिनेशन पुष्टि हुई। अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, जांच जारी है।

इंदौर का जल संकट मुख्य रूप से पाइपलाइन लीकेज, अतिक्रमण और रखरखाव की कमी से जुड़ा रहा है। हालिया घटना ने स्वच्छता रैंकिंग के बावजूद आधारभूत सुविधाओं की कमियों को उजागर किया है।

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