यात्री बसों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त: 45 दिन में दो दरवाजे और इमरजेंसी डोर अनिवार्य, लापरवाही पर बसें होंगी बंद

mp high court bus safety rules : जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यात्री बसों में सफर करने वाले आम लोगों की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में चल रही खटारा और असुरक्षित बसों पर लगाम कसते हुए अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सभी बसों में बाईं ओर दो दरवाजे और एक इमरजेंसी एग्जिट होना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर 45 दिनों के भीतर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं”

जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यह अत्यंत खेदजनक है कि कई लग्जरी और एसी बसों में भी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है। दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में केवल एक दरवाजा होना यात्रियों की जान को जोखिम में डालना है। अदालत ने साफ किया कि अगर निर्धारित समय सीमा में सुधार नहीं हुआ, तो ऐसी बसों का संचालन तुरंत बंद कर दिया जाए।

परिवहन विभाग से मांगा जवाब, शपथ-पत्र होगा पेश

अदालत ने इस गंभीर लापरवाही पर परिवहन विभाग के मुख्य अतिरिक्त सचिव को जवाब तलब किया है। विभाग को अब तक उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी शपथ-पत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश करनी होगी। आरटीए (RTA) को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बसों की फिटनेस जांच के दौरान इन मानकों की कड़ाई से पड़ताल करें।

अगली सुनवाई 27 अप्रैल को

मंडला निवासी द्वारा दायर इस याचिका पर अब अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को होगी। हाईकोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद बस ऑपरेटरों और परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से प्रदेश की बस परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा और यात्रियों का सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित हो सकेगा।

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