महिलाओं को मोहरा बनाती सत्ता को आतुर विश्व शक्तियाँ
ऐसा क्यों समझा जाता है कि पूर्वी देशो की महिलाएं, जो ज़्यादातर पर्दे मे होतीं है, वह पश्चिम के देशों की महिलाओं की अपेक्षा गंवार है, प्रताड़ित और शोषित है? और यह भी कि पश्चिम की औरतों की तरह ही विश्व भर की औरतों को हो जाना चाहिए!
पिछले वर्ष 2025 मे ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व अयाउल्लाह खेमनेयी ने विश्व भर की इस्लामिक महिलाओ को इकट्ठा कर उनसे कहा था कि यह आपस मे घुलने मिलने, इस्लाम पर बातें करने का अच्छा मौका है और यह भी कि पश्चिमी देश महिलाओं को स्वतन्त्रता देने के नाम पर उन्हे एक वस्तु की तरह इस्तेमाल कर रहे है जबकि हमे, यानि मुस्लिम महिलाओं को पश्चिमी देशों की नकल ना करके अपनी संस्कृति और अस्मिता की रक्षा खुद करनी है.

ऐसा लग सकता है कि खेमनेयी महिलाओं की सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक ज़िम्मेदारी और भूमिका के प्रति अति-रूढ़िवादी राय रखते थे, लेकिन ईरान मे महिलाओं की शिक्षा, उनकी पेशेगत संलग्नता तथा घर और बाहर के निर्णयों मे उनकी भूमिका जो कि, कई अन्य पूर्वी देशो के मुक़ाबले बेहतर है या ये कहें कि अच्छी स्थिति मे है, को देखकर ऐसा भी लग सकता है कि दुनिया मे ईरान के बारे मे जो दिखाने का प्रयास किया जा रहा है वह पूरा सच नहीं है.
हालांकि कुल मिला कर ईरान की महिलाओं की वास्तविक स्थिति को समझना एक गहन अध्ययन की मांग करता है परंतु साथ ही ये समय तत्काल एक साधारण सैद्धांतिक हस्तक्षेप की भी मांग करते हुए उन सभी महिलाओं का समर्थन कर उनके साथ खड़े होने की भी मांग करता है जो औरतों और मर्दों के समाज मे बराबर मानवीय और नैतिक मूल्य स्थापित करने और उन्हे उनके धर्म, आचरण, रहन-सहन, विश्वास स्थापित करने के निर्णय मे किसी अन्य देश या अपने ही देश के शासक के हस्तक्षेप का विरोध करतीं हैं.
विशेषज्ञ बताते हैं कि ईरान पर इज़राइल और अमेरिका का आक्रमण ईरान के कच्चे तेल के संसाधन पर अपना अधिकार स्थापित करने के उद्येश्य से प्रेरित है. यह भी अनुमान लगाया जाता है कि ईरान की बढ़ती समसामयिक शक्तियों को समाप्त करने के उद्येश्य से भी ये युद्ध लड़े जा रहे हैं. लेकिन इन सब अनुमानो के बीच यह बात भी याद रखना जरूरी है कि युद्ध आरंभ करने के पहले ईरान की महिलाओं की स्वायत्तता पर बहस और क्रान्ति को सर्वप्रथम हवा दी गयी और उन्हे ईरान की सड़कों पर स्थापित करते हुए एक हद तक आंतरिक सामाजिक अस्थिरता उत्पन्न की गयी. दुनिया का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान की महिलाओं को “इस्लामिक कट्टरपंथ” से छुटकारा दिलाने के लिए पिछले वर्ष कई बयान दिये जिसपर विश्व भर की महिलाओं, जो खेमनेयी से असहमत थी, ने अपनी सहमति दी.
मध्य पूर्व मे चल रही विश्व राजनीति की यह कूटनीति महिलाओं को ही मुहरा बनाकर महिलाओं के जीवन को किस तरह प्रभावित कर रही है उसे तीन मुख्य संकेतकों से समझा जा सकता है. संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन (UN Women) के अनुसार गाज़ा में अक्टूबर 2023 -25 तक 28,000 से अधिक महिलाएँ और लड़कियाँ मारी जा चुकी हैं, यानी औसतन प्रति घंटे एक मौत. यू एन की ही एक रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के परिणामस्वरूप अस्पतालों के बर्बाद होने से लगभग 50,000 गर्भवती महिलाएँ आवश्यक प्रसूति सेवाओं से वंचित पायी गयी. चिकित्सा सेवाओं की कमी के कारण प्रसव के दौरान मृत्यु का जोखिम तीन गुना तक बढ़ गया और नवजात शिशुओं की मृत्यु दर भी बढ़ी. जब ईरान मे महिला स्वतंत्रता पर आंदोलन बढ़े तब ईरान सरकार द्वारा अनिवार्य ड्रेस-कोड (हिजाब) और सामाजिक नियमों को कड़ाई से लागू करने के दौरान हिंसा बढ़ी जिसका एक उदाहरण हम वर्ष 2022 मे महसा अमीनी के केस मे देख सकते हैं. अतः विश्व मे कहीं भी युद्ध हो वह युद्ध मात्र भू-राजनीतिक विवाद नहीं होता बल्कि एक गंभीर लैंगिक (gender) संकट भी उत्पन्न करता है. महिलाएं पूर्व से हाशिए पर हैं, और अब भी अपने मानव अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष कर रहीं हैं, ऐसे मे महिलाओं की बढ़ती मौतें, स्वास्थ्य-सेवाओं का पतन और स्वतंत्रता पर नियंत्रण ये सभी मिलकर महिला के अधिकारों को स्थापित करने के प्रयासों को और अधिक पीछे धकेल देते हैं.