उच्च शिक्षा मंत्री टैंक राम वर्मा की पहल पर वित्त विभाग ने दी हरी झंडी; अगस्त महीने से लागू हो सकती है नई पॉलिसी
Chhattisgarh Guest Lecturer Salary Hike : छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत हजारों अतिथि व्याख्याताओं (Guest Lecturers) के लिए एक राहत भरी और बड़ी खबर सामने आ रही है। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे व्याख्याताओं के हक में साय सरकार जल्द ही एक बड़ा और संवेदनशील फैसला सुना सकती है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, उच्च शिक्षा मंत्री टैंक राम वर्मा की विशेष रुचि और पहल के बाद अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय में बढ़ोतरी कर इसे एकमुश्त (Fixed Salary) करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
समिति की सिफारिशों पर अमल, वित्त विभाग से मिली मंजूरी
अतिथि व्याख्याताओं की आर्थिक समस्याओं और वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए पूर्व में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई थी। समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में व्याख्याताओं के पक्ष में कई सकारात्मक और महत्वपूर्ण सिफारिशें की थीं। इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर उच्च शिक्षा विभाग ने नई नीति का पूरा खाका तैयार किया है।
इस मामले में सबसे बड़ी सफलता यह रही कि इस नई वेतन व्यवस्था के प्रस्ताव को वित्त विभाग (Finance Department) से भी हरी झंडी मिल चुकी है। वर्तमान में यह फाइल सचिवीय स्तर पर अंतिम प्रक्रियाओं से गुजर रही है। माना जा रहा है कि जैसे ही इस पर उच्च शिक्षा मंत्री के औपचारिक हस्ताक्षर होंगे, इसके क्रियान्वयन का आदेश तुरंत जारी कर दिया जाएगा।
अगस्त महीने से मिल सकता है बढ़ा हुआ वेतन
मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि सब कुछ तय रणनीति के अनुसार चलता रहा, तो अगस्त 2026 के वेतन से ही अतिथि व्याख्याताओं को इस नई और प्रभावी पॉलिसी का सीधा लाभ मिलने लगेगा। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार होगा जब अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय में एक साथ इतनी बड़ी और एकमुश्त वृद्धि की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा और उनके बीच आर्थिक सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।
पिछली सरकारों के मुकाबले साय सरकार का ‘क्विक डिसीजन’
इस फैसले को लेकर अतिथि व्याख्याताओं के बीच भारी उत्साह है और वे वर्तमान सरकार की कार्यशैली की सराहना कर रहे हैं। व्याख्याताओं का कहना है कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में उन्हें केवल खोखले आश्वासन मिलते थे और फाइलें अटकी रहती थीं। इसके ठीक उलट, वर्तमान उच्च शिक्षा मंत्री टैंक राम वर्मा ने मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित निर्णय (Quick Decision) लेते हुए न केवल फाइल को गति दी, बल्कि वित्त विभाग से भी इसे पास कराया।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों के जानकारों का मानना है कि यदि अगस्त महीने से यह पॉलिसी लागू हो जाती है, तो यह छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। मंत्री टैंक राम वर्मा के इस संवेदनशील कदम और तेज कार्यशैली ने प्रदेश के प्राध्यापकों और व्याख्याताओं के बीच सरकार के प्रति एक नया और मजबूत विश्वास पैदा किया है। फिलहाल विभाग के आधिकारिक आदेश का इंतजार है, लेकिन मंत्रालय की सरगर्मियां बता रही हैं कि व्याख्याताओं का लंबा इंतजार अब खत्म होने वाला है।