देश के उद्योगों और विमानन क्षेत्र को वित्तीय संकट से उबारने के लिए वित्त मंत्रालय ने 2.5 लाख करोड़ रुपये की एक बड़ी क्रेडिट गारंटी योजना का खाका तैयार कर लिया है। इस महत्वपूर्ण योजना के लिए कैबिनेट नोट तैयार हो चुका है और विभिन्न मंत्रालयों के बीच आवश्यक परामर्श की प्रक्रिया भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार व्यय वित्त समिति पहले ही इस प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे चुकी है जिसका सीधा मतलब है कि योजना के वित्तीय प्रभाव और डिजाइन की गहन जांच हो चुकी है। अब केवल केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मुहर का इंतजार है जिसके बाद इसे आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया जाएगा।

युद्ध और वैश्विक मंदी की मार झेल रहे सेक्टर्स को मिलेगा सहारा
यह प्रस्तावित योजना मुख्य रूप से उन एमएसएमई और एयरलाइंस कंपनियों के लिए संजीवनी साबित होगी जो पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण नकदी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इसे कोविड काल की प्रसिद्ध ईसीएलजीएस योजना के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है जिसका उद्देश्य सप्लाई चेन में आई रुकावट और बढ़ती इनपुट कॉस्ट के दबाव को कम करना है। सरकार इस भारी-भरकम राशि के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वित्तीय अनिश्चितता के दौर में ऋण चुकाने में कोई चूक न हो और कमजोर क्षेत्रों को बैंकों से कर्ज मिलता रहे। पश्चिम एशिया संकट के चलते कमोडिटी की कीमतों में आए उछाल और व्यापारिक बाधाओं को देखते हुए यह कदम अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सुरक्षात्मक साबित होगा।