नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को ईपीएफ योजना की वेतन सीमा संशोधन पर चार महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। यह सीमा पिछले 11 वर्षों से 15 हजार रुपये मासिक पर स्थिर है।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नवीन प्रकाश नौटियाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में कहा गया था कि मौजूदा वेतन सीमा आज की आर्थिक स्थितियों, महंगाई और न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप नहीं है, जिससे बड़ी संख्या में कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे से बाहर रह जा रहे हैं।
वर्तमान में ईपीएफ के लिए वेतन सीमा 15 हजार रुपये मासिक है। इससे अधिक बेसिक सैलरी एवं डीए वाले कर्मचारियों के लिए पीएफ कटौती अनिवार्य नहीं है। यह सीमा सितंबर 2014 से अपरिवर्तित है।
पीठ ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह में केंद्र सरकार के समक्ष आदेश की प्रति सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। केंद्र सरकार को चार महीने में इस पर निर्णय लेना होगा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि केंद्र एवं कई राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी ईपीएफओ सीमा से अधिक है, जिससे कर्मचारी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा से वंचित हो रहे हैं।
ईपीएफओ की 2022 उप-समिति ने भी वेतन सीमा बढ़ाने की सिफारिश की थी, जिसे केंद्रीय बोर्ड ने मंजूरी दे दी, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस पर फैसला नहीं लिया है। इस आदेश से लाखों कर्मचारियों को ईपीएफ कवरेज का लाभ मिलने की उम्मीद जगी है।