रायपुर, 21 जनवरी 2026: रायपुर पुलिस कमिश्नरी के संभावित विस्तार को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लग गया है। मुख्यमंत्री निवास में हुई कैबिनेट बैठक में कमिश्नरी के दायरे को बढ़ाने से जुड़े किसी प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई। इससे स्पष्ट हो गया है कि पुलिस कमिश्नरी प्रणाली पूर्व में तय सीमा के भीतर ही लागू की जाएगी।
कमिश्नरी विस्तार की चर्चा तब तेज हुई थी जब उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा था कि पूरे रायपुर जिले को नई प्रणाली में शामिल किया जाएगा। मौजूदा स्थिति से संकेत मिल रहे हैं कि सरकार फिलहाल व्यवस्था का विस्तार करने के पक्ष में नहीं है।
नई व्यवस्था 23 जनवरी से औपचारिक रूप से लागू होगी। सूत्रों के अनुसार आज शाम तक इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इससे राजधानी की पुलिसिंग एक नए प्रशासनिक ढांचे में प्रवेश करेगी।
पहले पुलिस कमिश्नर के नाम पर अंतिम मुहर अभी नहीं लगी है। सूत्रों के मुताबिक दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग को पहला पुलिस कमिश्नर बनाने की प्रबल संभावना है। हालांकि अंतिम क्षण में सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा का नाम भी विकल्प के रूप में सामने आ सकता है। नियुक्ति को लेकर शासन-प्रशासन में गहन विचार-विमर्श जारी है।
कमिश्नरी लागू होने के साथ कई प्रशासनिक अधिकार, जो अब तक जिला प्रशासन के पास थे, पुलिस कमिश्नर को हस्तांतरित हो जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे अपराध नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, यातायात संचालन और आपात स्थितियों में निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
हालांकि शस्त्र लाइसेंस और आबकारी से जुड़े अधिकारों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इससे पुलिस महकमे में असंतोष है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीमित अधिकारों वाली कमिश्नरी का कोई औचित्य नहीं बनता। डीजीपी द्वारा गठित समिति ने व्यापक अधिकार देने की सिफारिश की थी, लेकिन प्रशासनिक महकमे ने मध्य प्रदेश मॉडल को अपनाने की अनुशंसा की।
इस मुद्दे पर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पुलिस द्वारा मांगे गए कई अधिकारों पर आईएएस लॉबी ने रोक लगाई है। राज्य गठन के बाद यह पहला मौका है जब दोनों सेवाओं के बीच दूरियां इतनी बढ़ी दिख रही हैं। यह टकराव सरकार के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर रहा है।
नई व्यवस्था के तहत पुलिस कमिश्नर को कैदी अधिनियम, छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम, विष अधिनियम, जेल अधिनियम, अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम, राज्य सुरक्षा अधिनियम, मोटर वाहन अधिनियम, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, विस्फोटक अधिनियम और पेट्रोलियम अधिनियम के तहत महत्वपूर्ण अधिकार मिलेंगे। इनमें पैरोल, धरना-प्रदर्शन की अनुमति, निषेधाज्ञा, तलाशी वारंट, जेल सुरक्षा, छापेमारी, जिला बदर, यातायात नियंत्रण और विस्फोटक पदार्थों पर नियंत्रण जैसे अधिकार शामिल हैं।
सरकार इसे कानून-व्यवस्था सुधार का बड़ा कदम बता रही है, लेकिन पुलिस महकमे में बहस है कि सीमित अधिकारों वाली व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगी। अब सभी की निगाहें अंतिम अधिसूचना पर टिकी हैं, जिसमें अधिकारों की सीमा और आईएएस-आईपीएस टकराव को संतुलित करने का तरीका स्पष्ट होगा।