नई दिल्ली। देश में प्रवेश परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में परीक्षा प्रणाली में सुधार करने के लिए छह सदस्यीय विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस टीम का मुख्य काम परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना और व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
टास्क फोर्स की कमान और प्रमुख चेहरे
इस महत्वपूर्ण टास्क फोर्स की अध्यक्षता देश के जाने-माने तकनीकी विशेषज्ञ और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है। उनके साथ देश के अलग-अलग क्षेत्रों के पांच और दिग्गज विशेषज्ञों को इस समिति में शामिल किया गया है, जो अपनी विशेषज्ञता के जरिए परीक्षा प्रणाली को नया रूप देंगे।
समिति में शामिल अन्य विशेषज्ञ
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामाकोटी को अकादमिक और शोध क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र की गहरी समझ रखने वाली पूर्व नौकरशाह अनीता करवाल को भी इस टीम का हिस्सा बनाया गया है। सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ और खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख तपन डेका भी इस टास्क फोर्स में शामिल हैं, जो सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर सुझाव देंगे।
अंतरिक्ष और प्रशासन के दिग्गज भी शामिल
इस टीम में अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाने वाले इसरो के पूर्व प्रमुख डॉक्टर एस सोमनाथ को भी जोड़ा गया है ताकि तकनीकी अभियानों में उनके अनुभव का लाभ मिल सके। इसके साथ ही वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अमृत लाल मीणा को उनकी प्रशासनिक और प्रबंधन क्षमता के आधार पर इस छह सदस्यीय समिति में शामिल किया गया है।
व्यवस्था पर पड़ने वाला असर
सरकार के इस बड़े फैसले से आने वाले समय में देश की सभी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं का स्वरूप पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। इन सभी छह विशेषज्ञों के पास अपने-अपने क्षेत्र का लंबा अनुभव है। जानकारों का मानना है कि इस कदम से छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा फिर से मजबूत होगा और गड़बड़ियों पर पूरी तरह लगाम कसने में मदद मिलेगी।