:संजय सोनी:
भानुप्रतापपुर: छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अवसर पर शासकीय महर्षि वाल्मीकि स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भानुप्रतापपुर में 23 सितंबर को भूतपूर्व छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया था। यह सम्मेलन महाविद्यालय और पूर्व विद्यार्थियों के बीच गहरे संबंधों को पुनर्जीवित करने का सशक्त मंच बना। इस अवसर पर करीब 100 से अधिक भूतपूर्व विद्यार्थी शामिल हुए, जिन्होंने अपने अनुभव साझा किए और महाविद्यालय की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार व्ही उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त प्राध्यापक श्यामानंद डेहरिया, सेवानिवृत्त ग्रंथपाल अनिता सक्सेना, सेवानिवृत्त क्रीड़ा अधिकारी सी.पी. ठाकुर, अंतागढ़ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. रमेश कुमार दर्रो एवं जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रत्नेश सिंह मंचासीन रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. रश्मि सिंह ने किया।
सर्वप्रथम महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रश्मि सिंह ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भूतपूर्व छात्र सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि महाविद्यालय और पूर्व छात्रों के बीच जीवनभर बने रहने वाले रिश्तों को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्र ही संस्थान की असली पहचान होते हैं और उनकी सफलता ही वर्तमान विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी संदेश है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो. अरुण कुमार व्ही ने अपने संबोधन में कहा लगभग दस साल बाद मैं इस महाविद्यालय आया हूँ। यह मेरे लिए ‘होम कमिंग’ जैसा अनुभव है। मैंने हमेशा इस संस्थान को अपना घर माना है और आज यहाँ उपस्थित होकर गर्व महसूस कर रहा हूँ।
उन्होंने स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में जब महाविद्यालय ने नैक मूल्यांकन कराया था, तब पूरे राज्य में स्नातक वर्ग का दूसरा बी ग्रेड प्राप्त महाविद्यालय तथा बस्तर संभाग का पहला नैक मूल्यांकित महाविद्यालय था। यह उपलब्धि उस समय की एक बड़ी पहचान बनी। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए SMART शब्द की व्याख्या की। उन्होंने कहा, यदि SMART से S हटा दें, तो MART रह जाता है और यदि M भी हटा दें तो केवल ART बचता है। यानी हर विद्यार्थी में कला और सृजनात्मकता छिपी होती है, बस उसे पहचानने और निखारने की जरूरत है।
अंत में इतिहास विषय के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जब तक विद्यार्थी इतिहास से भावनात्मक जुड़ाव नहीं बनाएंगे, तब तक उसका वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि रिवर्सिबल क्विज़ जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को इतिहास से जोड़ने काफी बेहतर माध्यम हो सकती हैं।
सेवानिवृत्त प्राध्यापक श्यामानंद डहरिया ने महाविद्यालय की स्थापना और शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए कहा हमने इस महाविद्यालय को बचपन से युवावस्था तक बढ़ते हुए देखा है। इसकी प्रगति में कई शिक्षकों और विद्यार्थियों का त्याग जुड़ा हुआ है। लंबे समय तक यहाँ प्राचार्य रहे कुमार सर से हमने बहुत कुछ सीखा।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल कक्षा में पढ़ाना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की अन्य समस्याओं का समाधान करना भी उतना ही आवश्यक है। जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रत्नेश सिंह ने कहा कि एलुमनी मीट वर्षों बाद पुराने मित्रों से मिलने जैसा अनुभव कराता है।
उन्होंने इसे पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को साझा करने और नए लक्ष्य तय करने का सशक्त मंच बताया। उन्होंने छात्रों से कहा कि NET, SET, पीएचडी जैसी योग्यताएँ हासिल कर चुके पूर्व छात्रों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें और महाविद्यालय का नाम रोशन करें।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त क्रीड़ा अधिकारी सी.पी. ठाकुर, सेवानिवृत्त ग्रंथपाल अनिता सक्सेना, प्रो. रमेश कुमार दर्रो एवं जनभागीदारी समिति सदस्य शंकर गांधी ने भी अपने विचार रखे।

भूतपूर्व विद्यार्थियों ने किया कॉलेज दिनों को याद
कार्यक्रम में भूतपूर्व विद्यार्थियों ने अपने कॉलेज के समय को याद किए। पूर्व छात्र देवलाल नरेटी ने कहा कि यदि जीवन में कुछ बड़ा करना है तो सबसे पहले स्पष्ट लक्ष्य तय करें और फिर उसे पाने के लिए पूरी निष्ठा और मेहनत से जुट जाएँ।
पूर्व छात्रा तनुजा बेलसरिया ने विद्यार्थियों को लगन से पढ़ाई करने और अवसरों का सदुपयोग करने की प्रेरणा दी। इसी तरह गुलशन गोगड़, राधेश्याम औरसा, डॉ. कुमार सिंह टोप्पा, डॉ. टुपेश कुमार कोसमा, डॉ. सूर्यकांत देवांगन, आकाश सोलंकी सहित अन्य पूर्व छात्रों ने भी अपनी-अपनी यादें साझा कीं और वर्तमान छात्रों को मार्गदर्शन दिया।
उपलब्धि प्राप्त पूर्व छात्रों का सम्मान
इस अवसर पर महाविद्यालय ने उन भूतपूर्व विद्यार्थियों को विशेष रूप से सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर विभिन्न प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता पाई है और आज प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं। साथ ही वे विद्यार्थी भी सम्मानित किए गए जिन्होंने उच्च शिक्षा में विशेष योग्यता प्राप्त की है, जैसे NET-SET, पीएचडी तथा अन्य उच्च डिग्रियाँ हासिल करने वाले को सम्मानित किया गया है। यह सम्मान न केवल उनकी उपलब्धियों की स्वीकृति था बल्कि वर्तमान विद्यार्थियों को आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा देने का माध्यम भी बना।
सांस्कृतिक कार्यक्रम बना आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन के अंत में वर्तमान विद्यार्थियों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। गीत-संगीत और नृत्य से सजे कार्यक्रम ने सभी का मन मोह लिया और पूरे वातावरण को उल्लासमय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन अंजू कश्यप, नीलिमा सलाम, श्रीदाम ढाली तथा आभार व्यक्त एनईपी संयोजक रितेश कुमार नाग द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक कमल किशोर प्रधान, डॉ. नसीम अहमद मंसूरी, सुषमा चालकी, नंदिनी कश्यप सहित सभी प्राध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे