नई दिल्ली। राजधानी में नए साल के मौके पर भी लोगों को जहरीली हवा से राहत नहीं मिल सकी। खराब मौसमी परिस्थितियों के चलते दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी राजधानी की हवा बेहद खराब दर्ज की गई। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, शुक्रवार सुबह दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 321 रहा, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है।
सुबह की शुरुआत घने कोहरे और धुंध की मोटी परत के साथ हुई, जिससे कई इलाकों में दृश्यता काफी कम रही। इसके कारण लोगों को आंखों में जलन की शिकायत हुई, जबकि सांस के रोगियों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, अलीपुर में एक्यूआई 292, आनंद विहार में 348, अशोक विहार में 316, आया नगर में 235, बवाना में 227, बुराड़ी में 257 और चांदनी चौक में 340 दर्ज किया गया। इसके अलावा डीटीयू में 286, द्वारका सेक्टर-8 में 303, आईजीआई एयरपोर्ट टी-3 क्षेत्र में 219, आईटीओ में 292, जहांगीरपुरी में 318, लोधी रोड पर 284, मुंडका में 324, नजफगढ़ में 254, नरेला में 292, पंजाबी बाग में 308, आरके पुरम में 319, रोहिणी में 315, सोनिया विहार में 306, विवेक विहार में 330 और वजीरपुर में एक्यूआई 436 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में है।
हवा क्यों बिगड़ रही है
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बनी गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसम का मिजाज है। तापमान में गिरावट के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से ठंडी हवा नीचे ही फंसी रहती है और ऊपर नहीं उठ पाती। इसी ठंडी हवा में वाहनों का धुआं और निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल जैसे प्रदूषक जमा हो जाते हैं। बारिश न होने और हवा की रफ्तार धीमी रहने से यह प्रदूषण बाहर नहीं निकल पाता, जिससे हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक क्या दर्शाता है
वायु गुणवत्ता सूचकांक 0 से 50 के बीच होने पर हवा को साफ माना जाता है। 51 से 100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच मध्यम, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बेहद खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर श्रेणी मानी जाती है। गंभीर स्थिति में वायु गुणवत्ता सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक होती है और पहले से बीमार लोगों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकती है।