तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में महिलाओं के सामने उभरते खतरों को लेकर अभिनेत्री सोहा आली खान ने गंभीर चिंता व्यक्त की है. AI इंडिया इम्पैक्ट समिट में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विस्तार अभूतपूर्व अवसर लेकर आया है, लेकिन इसके दुरुपयोग की आशंकाएँ भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ी हैं. ऐसे में “नैतिक एआई” अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है.
समिट के दौरान सोहा अली खान ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल परिवर्तन ने महिलाओं को नए अवसर दिए हैं. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाएं उद्यमिता, शिक्षा और अभिव्यक्ति के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि डिजिटल टूल्स और साक्षरता अभियानों ने युवा महिलाओं को आत्मविश्वास दिया है, जिससे वे अपनी पहचान बना पा रही हैं और अपनी कहानियां वैश्विक मंच तक पहुँचा रही हैं.

उन्होंने एआई के सकारात्मक पक्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान बनाती है, शिक्षा को अधिक सुलभ करती है और मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी खाइयों को पाटने में मददगार हो सकती है. उनके अनुसार, तकनीक ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं को नए अवसर उपलब्ध कराए हैं.
हालांकि, उन्होंने यह भी आगाह किया कि डिजिटल दुनिया समाज की असमानताओं से अलग नहीं है. एआई के तेज, सस्ते और व्यापक रूप से उपलब्ध होने के कारण इसका दुरुपयोग भी बढ़ा है. डीपफेक तैयार करना, तस्वीरों में हेरफेर करना, किसी की आवाज़ या पहचान की नकल करना और निजी डेटा का दुरुपयोग अब पहले से कहीं आसान हो गया है. इन परिस्थितियों में महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बनाए जाने का खतरा अधिक है.
सोहा अली खान ने कहा कि ऑनलाइन हिंसा या दुष्प्रचार केवल तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नैतिक एआई का अर्थ है तकनीक के डिजाइन में ही सुरक्षा को शामिल करना, गोपनीयता को डिफॉल्ट व्यवस्था बनाना, शिकायतों के लिए पारदर्शी तंत्र स्थापित करना और जवाबदेही सुनिश्चित करना.
उन्होंने नीति-निर्माताओं, टेक कंपनियों और समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षा उपायों को भी समान प्राथमिकता दी जाए. यदि महिलाएं डिजिटल मंचों पर सुरक्षित महसूस करेंगी, तभी वे पूर्ण क्षमता के साथ आगे बढ़ सकेंगी.
यह कार्यक्रम यूनाइटेड नेशंस पोपुलशन फंड (UNFPA) द्वारा इकगाइ लॉं (Ikigai Law) और यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबोर्न के सहयोग से आयोजित किया गया था. इसमें विभिन्न क्षेत्रों के नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि और शोधकर्ता शामिल हुए। समिट में जिम्मेदार नवाचार, डिजिटल समानता और सुरक्षित तकनीकी भविष्य पर व्यापक चर्चा की गई.
समिट का संदेश स्पष्ट रहा कि भारत जब डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि एआई का विकास महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों के साथ समझौता किए बिना हो.डेस्क रिपोर्टिंग, आज की जनधारा