सुभाष मिश्र
प्रयागराज का कुंभ आज पूरी दुनिया में धार्मिक आस्था और विश्वास का सबसे बड़ा उत्सव बन गया है। देश-दुनिया से बहुत सारे लोग यहां लगातार आ रहे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा लोग अब तक गंगा में डुबकी लगा चुके हैं। उत्तर प्रदेश का पूरा मंत्रिमंडल गंगा में डुबकी लगाकर जल क्रीड़ा कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी वहां पर आकर डुबकी लगाने जा रहे हैं। इस अनूठे और अद्भुुत आयोजन में साधु-संत और धर्मपरायण जनता के अलावा सोशल मीडिया के ज़रिए चर्चा में बने रहने वाले लोग भी हैं। इन दिनों कोई अपनी सुंदरता तो कई अपनी आंखों और चेहरे की मुस्कान और कोई अपने नये-नये प्रयोगों, आध्यात्मिक शक्ति और ऊटपटांग हरकतों के कारण भी चर्चा में है। ऐसे आयोजनों में मीडिया भी अपनी रूचि, व्यवसायिक ज़रूरतों और अलग दिखने की चाह के कारण बाकीयों से अलग कुछ नया दिखाना चाहता है। बहुत सारे अखाड़ों के बीच नागा साधुओं और साध्वियों और किन्नरों और भीड़ से अलग दिखने वालों पर होती है। इनके बीच में यदि मोनालिसा की मुस्कान लेकर कोई सुंदरी चली आए या कुछ ऐसी साध्वियां चली आये जो बहुत सुंदर हो या जो वह जानती हो कि उनको इस सोशल मीडिया के दौर में किस तरह वायरल होना है तो उनका एक अलग ही जलवा होता है। पूरी दुनिया में मोनालिसा की मुस्कान चर्चित है। ऐसा माना जाता है कि इतालवी चित्रकार लियोनाजर्डो दा विंची ने मोनालिसा नामक यह तस्वीर 1503 से 1514 के बीच बनाई थी। ये तस्वीर फ्लोरेंस के एक गुमनाम से व्यापारी ‘फ्रांसेस्को देल जियोकॉन्डोÓ की पत्नी ‘लीज़ा घेरार्दिनीÓ को देखकर बनाई गई है। यह पेंटिंग फ्रांस के लूविरे संग्रहालय में रखी हुई है। इसके बाद से बहुत सी पेंटिंग इसकी कॉपी के रूप में बनी किन्तु मोनालिसा की मुस्कान सबसे निराली है। ऐसी ही मुस्कान प्रयागराज कुंभ में जीवंत दिखाई दी तो लोग दीवाने होकर उसके पीछे हो लिए। हम बात कर रहे हैं प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही मोनालिसा की, जो अब अपनी मुस्कान छिपाकर लोगों से बचने के लिए अपना मुँह छिपाते घुम रही है। महाकुंभ में कुछ साध्वी, कुछ साधु संत, कुछ बाबा, कुछ अखाड़े अलग-अलग कारणों से सुर्खियॉं बटोर रहे हैं।
महाकुंभ भारत का सबसे बड़ा धार्मिक और संस्कृतिक आयोजन है जो हर 12 साल में होता है। प्रयागराज में क्योंकि त्रिवेणी का संगम है तो वहां पर लाखों करोड़ों लोग व साधु-संत इक_े हो रहे हैं। इस समय पूरेे देश में एक सनातनी संस्कृति की बात हो रही है। इसकी प्रमुख वजह केन्द्र राज्य की सनातनी सरकारें हैं चाहे यूपी की योगी सरकार हो चाहे केंद्र की मोदी सरकार हो, चाहे छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव की सरकार हो, चाहे मध्य प्रदेश में मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार हो। इस समय देश में सनातन को रुझान कुछ ज्यादा ही है। कुंभ के मेले में यदि ऐसे में अगर साधु-संत बड़ी संख्या में आते और उनमें से कुछ सोशल मीडिया के ज़रिए चर्चा का केन्द्र बिंदु बनते हैं तो इसमें किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। सोशल मीडिया के प्लेटफार्म चाहे वह इंस्टाग्राम और ट्विटर हो, फेसबुक हो, यूट्यूब हो इस पर भी बहुत सारे लोग अपने अनुभव विचार तस्वीर साझा करते हैं और जिसे पूरी दुनिया के लोगों को पता चल सके। महाकुंभ को लोकप्रिय बनाने में सरकार की भी अहम भूमिका है।
मोनालिसा की मुस्कान वाली लड़की की मैं बात करूं तो वह लड़की लोगों को मेले में दिखाई थी और धीरे-धीरे जन आकर्षण का केंद्र बन गई। मोनालिसा की मुस्कान बिखेरती खूबसूरत लड़की इंदौर से थी। कुंभ के मेले में माला बेचने के लिए आई थी। पूरे देश दुनिया में व्यापार का बहुत बड़ा केन्द्र होते हैं ऐसे मेले। मेले में व्यापारी भी आते हैं बहुत सारी की चीज बेचते हैं तो यह लड़की माला चने आई थी पर अपनी खूबसूरती, मुस्कान और आंखों की आकर्षकता की वजह से सोशल मीडिया पर लोग उसकी तुलना मोनालिसा से करने लगे और धीरे-धीरे जो है सोशल मीडिया की वजह से वो वायरल हो गई।
प्रसंगवश कबीर का दोहा याद आ गया-
दोऊ जन तीर्थ चले, चित चंचल मन चोर
एकऊ पाप ना उतारिया दस मन लाते और।।
बहुत सारे जो लोग मेले-ठेले में जाते हैं गंगा में डुबकी भी लगाते हैं पर बावरा मन कहींअटक जाता है। निरंजन अखाड़े से जुड़ी एक और सुंदरी काफ़ी चर्चा में है जिसका नाम रिछारिया है। इस सुंदर साध्वी का रथ पर बैठने के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो के बाद कई संतों ने उन्हें कॉल किया और विवाद शुरू हो गया और इस विवाद के बाद रोते हुए इंस्टाग्राम पर उसने वीडियो पोस्ट किया, अब उन्होंने महाकुंभ छोडऩे का ऐलान कर दिया। एक बाबा है आईआईटी पासआऊट अभय सिंह उनका नाम है। पढ़ाई के बाद उन्होंने धर्म की राह अपनाई और महाकुंभ में वह चर्चा का विषय बने। अपनी शिक्षा और विचारों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जूना अखाड़ा ने उन्हें अनुशासन और गुरु के प्रति सम्मान ना दिखाने कारण प्रवेश पर रोक लगा दी। उनका यह काम महाकुंभ के पारंपरिक नियमों के खिलाफ था जिससे उन्हें अखाड़े में आने से रोक दिया गया। एक डॉक्टर भी चर्चा में है। हमारे पूरे देश में आप जहां कहीं भी जाए आपको असली पढ़े-लिखे डॉक्टरों से ज़्यादा लोकप्रिय बाबा छाप डॉक्टर मिलेंगे। हर साल इतने सारे डॉक्टर मेडिकल कॉलेज से पढ़कर निकलते हैं वे चाहे एमबीबीएस करें, एमडी करें या डीएम करें उनकी उतनी पूछ-परख नहीं होती जितनी बाबानुमा डॉक्टरों की। कुंभ के मेले में एक डॉक्टर हैं वह अपने अनोखे इलाज के कारण प्रसिद्ध हो गये हैं। उन्होंने वहां शिविर लगाया है। यह बाबा भुवनेश्वर से आए हैं और नि:शुल्क चिकित्सा देने के लिए मशहूर हैं। बाबा ने दावा किया कि भगवान शिव की कृपा से बीमारियों का इलाज करते हैं।
पहलवान बाबा, राजपाल सिंह, महाकुंभ में अपनी शक्ति और नशामुक्ति अभियान के कारण सुर्खियों में हैं। उनका उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखना और शारीरिक फिटनेस के प्रति जागरूक करना है। वह अपनी 50 वर्ष की उम्र में भी एक हाथ से 10,000 पुश-अप्स लगा सकते हैं जो युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। पहलवान बाबा का मानना है कि शरीर और मानसिकता में संतुलन बनाए रखना जीवन की सफलता है।
35 साल से काटों पर सोने वाला बाबा रमेश कुमार मांझी जो अपने जीवन के 35 साल काटों की सेज पर सोने में बिता चुके हैं, महाकुंभ में एक अलग ही आकर्षण बने हुए हैं। उनका तप और साधना लोग देख रहे हैं और आश्चर्यचकित हो रहे हैं। यह बाबा अपनी साधना को एक आखिरी सत्य मानते हैं और इस तरह की तपस्या के लिए महाकुंभ में प्रसिद्ध हो गए हैं। महाकुंभ में आए गंगापुरी महाराज उर्फ छोटू बाबा की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। वह 3 फीट हाइट के हैं और 57 वर्ष की उम्र में भी बच्चों जैसा कद रखते हैं। उनका दावा है कि उन्होंने पिछले 32 साल से स्नान नहीं किया और सन्यास की राह अपनाई है। उनका जीवन और साधना महाकुंभ में लोगों के बीच आकर्षण का कारण बनी है। गीतानंद जी महाराज, जिनके सिर पर 45 किलो रुद्राक्ष की मालाएं हैं, महाकुंभ में अपनी तपस्या से सबका ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य महादेव को प्रसन्न करना है और उन्होंने अपनी तपस्या से यह साबित कर दिया कि उनका समर्पण और विश्वास अडिग है।
अमरजीत बाबा, जो सिर पर गेहूं, जौ, बाजरा जैसी फसलों को उगाते हैं, महाकुंभ में एक अनोखे बाबा के रूप में पहचाने जाते हैं। उनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना है और वे 14 वर्षों से सिर पर फसल उगाकर पर्यावरण की अहमियत को प्रदर्शित कर रहे हैं।
नाखून बाबा के नाम से प्रसिद्ध महाकाल गिरी बाबा, जो पिछले 9 साल से एक हाथ को हवा में उठाए हुए हैं, महाकुंभ में अपने संकल्प के कारण चर्चित हो गए हैं। उनका उद्देश्य धर्म और गौरक्षा के प्रति अपनी निष्ठा को प्रमाणित करना है, और उन्होंने अपना हाथ कभी नीचे नहीं किया। उनके नाखून भी नहीं काटे गए हैं, जिससे उनकी तपस्या और संकल्प की गहरी मिसाल पेश होती है।
महाकुंभ अपने जनसैलाब, जनआस्था के साथ-साथ, तरह-तरह के अजूबों की वजह से भी चर्चा में बना हुआ है। नाखून हम लोगों को काटना पड़ता है बहुत सारी लड़कियां बड़े-बड़े नाखून रखती पर उसको मेंटेन करती है और उसके लिए भी काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। नाखून का बढऩा पशुता की निशानी माना जाता है। कई नाखून बढ़ाने से तो कोई 35 साल से नहीं नहाने के कारण चर्चा में है। बहुत लोगों को लगता है कि उन्होंने जीवन में जो कुछ भी पाप किये है और उनको पुण्य कमाना है तो गंगा में आकर ख़ास मुहूर्त में अगर त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा लेंगे तो उनके जो पाप है जो कम हो जाएंगे या वे पवित्र हो जाएंगे। यह आस्था के प्रदर्शन का समय है। ये एक दूसरे के सोशल मीडिया पर तस्वीरें, वीडियो डालकर बताने का समय है। लोग एक दूसरे से पूछते हैं क्या कुंभ में जाकर स्नान किया। बहुत सारे लोग उत्सवधर्मी हैं जब भी कहीं जाते हैं तो वह वहां से लाइव स्ट्रीम करते हैं वीडियो बनाते हैं सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं और इसी तरह का काम बहुत सारे बाबा, मंत्री, संत्री सब कर रहे हैं।
दरअसल, इस समय जो धर्म की ध्वजा लेकर चलेगा वह निश्चित रूप से आगे बढ़ेगा इस बात को लोग समझ गए हैं। लोग जितने धार्मिक है नहीं उससे धार्मिक अपने को बता रहे हैं। नमामि गंगा प्रोजेक्ट के बावजूद गंगा साफ़ नहीं हो पा रही है। बहुत लोग गंगा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं और कुछ लोग गंगा को गंदा करने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। बहुत बार यह कहा जाता है कि गंगा का पानी पीने लायक नहीं है पर इसको दूषित करने वाले बाज नहीं आ रहे हैं। अपने उदगम से लेकर हरिद्वार तक गंगा का पानी बहुत अच्छा है। गंगा को जीवनदायिनी, पापहरणी कहा जाता है। प्रयागराज में संगम में स्नान सबसे पवित्र माना जाता है। यह पूरा कुंभ का मेला एक बहुत चुनौतीपूर्ण इवेंट है जो मैनेजमेंट का एक नया पाठ है। इतने बड़े जन समुदाय को संभाल के रखना बड़ी बात है। एक-दो घटनाओ को छोड़ दें तो पूरा कुंभ बहुत व्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा है।