डिजिटल जनगणना 2027: मौलाना खालिद रशीद ने मुस्लिम समुदाय से धर्म और भाषा पर स्पष्ट जानकारी देने की अपील की

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रसिद्ध मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने आगामी जनगणना 2027 को लेकर मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण आह्वान किया है। उन्होंने समुदाय के लोगों से अपील की है कि जनगणना के दौरान अपनी धार्मिक और भाषाई पहचान को पूरी स्पष्टता के साथ दर्ज कराएं। मौलाना का मानना है कि सटीक डेटा के आधार पर ही भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ सही ढंग से मिल सकेगा।

धर्म और भाषा को लेकर विशेष सुझाव

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने जोर देते हुए कहा कि जनगणना फॉर्म भरते समय धर्म के कॉलम में केवल ‘इस्लाम’ दर्ज करें। इसके साथ ही उन्होंने मातृभाषा के स्थान पर हिंदी के बजाय ‘उर्दू’ लिखने की सलाह दी है। उन्होंने तर्क दिया कि अक्सर लोग बोलचाल की भाषा के आधार पर अनजाने में हिंदी लिख देते हैं, लेकिन अपनी सही पहचान दर्ज करना आवश्यक है। उनके अनुसार, जब सरकार जन कल्याणकारी योजनाएं तैयार करेगी, तब इसी डेटा का उपयोग किया जाएगा, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होगी।

देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना

बता दें कि जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न किया जा रहा है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मकान सूचीकरण का कार्य त्रुटिहीन और समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। इस कार्य के लिए 10 अप्रैल तक लगभग 5.5 लाख गणना करने वालों का डेटाबेस तैयार कर लिया जाएगा। डिजिटल तकनीक के व्यापक इस्तेमाल से डेटा को पारदर्शी और सुलभ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

7 मई से खुलेगा स्व-गणना पोर्टल

जनगणना प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार 7 मई से स्व-गणना पोर्टल खोलने जा रही है। इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों और मंडलायुक्तों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में आंकड़ों की सटीकता पर विशेष ध्यान दिया जाए। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी इस प्रक्रिया के तहत अपना विवरण ऑनलाइन दर्ज कर डिजिटल जनगणना की शुरुआत की है।

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