’जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर, आंगनबाड़ी केंद्रों पर ओ आर एस – जिंक कॉर्नर स्थापित होंगे’
कोरिया 28 जुलाई 2026/ कलेक्टर रोक्तिमा यादव के निर्देशानुसार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रशांत सिंह के मार्गदर्शन में 1 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक जिले में ’डायरिया रोकथाम अभियान का आयोजित किए जाएंगे।
देश में डायरिया आज भी बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक गंभीर समस्या है, विशेष कर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में डायरिया के कारण – बीमारी और मृत्यु का खतरा अधिक रहता है। डायरिया की रोकथाम, समय पर उपचार, स्वछता, स्वच्छ पेयजल एवं जन जागरूकता के लिए सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रत्येक 5 वर्ष तक के बच्चों में डायरिया के खतरे को कम कर, मृत्यु को रोकना, गांव-गांव, शहर – शहर, हर मोहल्ले में इस अभियान का प्रचार – प्रसार किया जाएगा। जिसके तहत आज डायरिया रोकथाम अभियान रथ को कलेक्टर ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना।

भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर ’स्टाप डायरिया कैंपन अभियान चलाया जा रहा है ’इस वर्ष के अभियान का नारा’ ’स्वच्छ जल, समुचित उपचार – डायरिया से बचें हर बार इस अभियान का उद्देश्य यह है कि डायरिया की रोकथाम एवं उपचार से जुड़ी सेवाओं को और सुदृढ़ करना है । अभियान में बचाव, रोकथाम और उपचार की रणनीति पर विशेष ध्यान देते हुए विभिन्न क्षेत्रों के समन्वित सहयोग के माध्यम से डायरिया की रोकथाम, प्रबंधन एवं प्रभावी उपचार संबंधी उपायों को और मजबूत किया जाना है। इस पहल में स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और परिवारों को शामिल कर सके , जिन में जन्म के उपरांत पहले 6 माह तक शिशु को केवल मां का ही दूध दिया जाना , टीकाकरण (विशेष रूप से रोटावायरस) स्वच्छ पेयजल का सेवन, साबुन से हाथ धोना (हाथ धोने के तरीके की जानकारी देना), साफ – सफाई तथा सभी स्वास्थ्य केंद्रों आंगनबाड़ी केंद्रों में ओआरएस एवं जिंक टेबलेट की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए, ’ओ आर एस – जिंक कॉर्नर’ स्थापित हो या बना हुआ हो।
डायरिया कई कारणों से फैलता है अलग-अलग विभाग मिलकर गांव समुदाय स्तर पर एकजुट हो प्रभावी गतिविधियां – जैसा की साफ शौचालय का उपयोग, हाथ धोने के सही तरीके, सेनेटरी अपशिष्ट सहित कचरे का सुरक्षित निपटान, पीने के पानी की जांच (विशेष कर डायरिया प्रभावित क्षेत्र में) तथा गांव में स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति, ग्राम पंचायत एवं ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित बैठकों का आयोजन कर समुदाय स्तरीय सुनिश्चित हो, इस अभियान में जनप्रतिनिधियों, विशेष कर पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी से इसे अभियान को मजबूती मिलेगा। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए- राशन की दुकान, स्व- सहायता समूह, नुक्कड़ – नाटक, पोस्टर, समाचार – पत्र, जागरूकता- रथ जैसे माध्यमों का उपयोग कर जिले में इस अभियान को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।