बॉयलर हादसे में बड़ी कार्रवाई पर बहस: अनिल अग्रवाल के पक्ष में आई देश की बड़ी हस्तियां

रायपुर। छत्तीसगढ़ के डभरा स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हुए दर्दनाक बॉयलर फटने के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस हादसे के बाद दर्ज की गई एफआईआर (FIR) में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम शामिल किए जाने पर देश के जाने-माने उद्योगपतियों और सार्वजनिक हस्तियों ने आपत्ति जताई है। नवीन जिंदल और किरण बेदी जैसे प्रमुख चेहरों ने इस कार्रवाई को लेकर निष्पक्ष जांच की पैरवी की है।

क्या है पूरा मामला? बीते 14 अप्रैल को सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित प्लांट में भीषण बॉयलर ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 36 से ज्यादा श्रमिक बुरी तरह झुलस गए थे। इस मानवीय त्रासदी के बाद पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू की, लेकिन एफआईआर में सीधे शीर्ष नेतृत्व का नाम आने पर सवाल उठने लगे हैं।

नवीन जिंदल ने उठाए सवाल, संगठनों से की अपील प्रमुख उद्योगपति नवीन जिंदल ने इस मामले पर तीखा रुख अपनाते हुए इसे निवेश के माहौल के लिए चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि बिना विस्तृत तकनीकी जांच के किसी कंपनी के चेयरमैन का नाम एफआईआर में डालना समझ से परे है। जिंदल ने CII और FICCI जैसे बड़े उद्योग संगठनों से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि जवाबदेही के नियम निजी और सार्वजनिक क्षेत्र, दोनों के लिए एक समान होने चाहिए।

किरण बेदी और विशेषज्ञों ने दी संतुलित राय पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने इस संवेदनशील मामले में संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जांच तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए न कि जल्दबाजी में लिए गए फैसलों पर। वहीं, बाजार विशेषज्ञ मोहनदास पाई और विजय केडिया ने भी इसे ‘अतिरेक’ बताते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की निवेश छवि प्रभावित हो सकती है।

अब क्या है मांग? उद्योग जगत और कानूनी विशेषज्ञों का एक ही सुर है कि हादसे की गहराई से तकनीकी जांच हो और असली दोषियों पर कार्रवाई की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अनुमान या दबाव में आकर की गई कानूनी कार्रवाई से असली समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उद्योग जगत का भरोसा डगमगाएगा।

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