नक्सल छाया के बीच उम्मीद की फसल… धान बेचकर किसान ने खरीदा ट्रैक्टर, बस्तर में बदली तस्वीर…

रायपुर। नक्सल प्रभावित बस्तर अंचल में अब बदलाव साफ दिखने लगा है। जहां कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, वहां अब खेतों में ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चल रहे सुशासन और कृषि प्रोत्साहन योजनाओं का असर जमीन पर नजर आने लगा है।

सुकमा जिले के छिंदगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम चिपुरपाल के किसान कोयना बघेल इस बदलाव की मिसाल बने हैं। उन्होंने बिरसठपाल धान खरीदी केंद्र में 50 क्विंटल धान बेचा, जिसका भुगतान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मात्र 48 घंटे में सीधे उनके बैंक खाते में जमा हो गया। समय पर भुगतान मिलने से किसान ने मैसी फर्गुसन ट्रैक्टर ट्रॉली सहित खरीद लिया।

कोयना बघेल ने बताया कि शासन की धान खरीदी व्यवस्था से छोटे और मध्यम किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। बिचौलियों की भूमिका खत्म होने और पारदर्शी व्यवस्था से किसानों का भरोसा बढ़ा है।

ट्रैक्टर मिलने से खेती के काम आसान हुए हैं और किसान अब पीएम आवास निर्माण जैसे कार्यों में सामग्री ढुलाई कर अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं। इससे क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

सुकमा कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि यह सफलता किसान की मेहनत और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि किसानों को धान खरीदी केंद्रों पर पारदर्शिता, सुविधा और समयबद्ध भुगतान मिले।

प्रशासन की सख्त निगरानी और जीरो टॉलरेंस नीति के चलते धान खरीदी केंद्र अब सुविधा केंद्र के रूप में काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में कृषि को बढ़ावा देकर नक्सलवाद की जगह विकास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई जा रही है।

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