नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर ढाई घंटे तक सुनवाई हुई। पीठ ने कहा कि मामला केवल कुत्ते के काटने का नहीं है, बल्कि सड़क पर दौड़ते या पीछा करते समय दुर्घटना का खतरा भी रहता है। रोकथाम इलाज से बेहतर है।
बहस में आवारा कुत्तों के पक्ष में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि लोग सेंटर पर फोन कर कुत्तों को पकड़वाकर नसबंदी करा सकते हैं। इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि अब बस एक चीज बाकी है, कुत्तों को काउंसलिंग देना, ताकि छोड़ने पर वे काटें नहीं।
पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि कुत्तों के कारण आम लोगों को कब तक परेशानी झेलनी पड़ेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश सड़कों के लिए नहीं, बल्कि केवल संस्थागत क्षेत्रों के लिए है। पीठ ने सवाल उठाया कि स्कूलों, अस्पतालों एवं अदालत परिसरों में आवारा कुत्तों की क्या आवश्यकता है और उन्हें वहां से हटाने पर क्या आपत्ति हो सकती है।
सिब्बल ने कहा कि मंदिरों आदि में जाने पर उन्हें कभी कुत्ते ने नहीं काटा। इस पर पीठ ने जवाब दिया कि आप खुशकिस्मत हैं। लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है और लोग मर रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10:30 बजे होगी।