रायपुर। राज्य के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने शर्तों के साथ अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है। अब इस मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी।

क्या है मामला?
EOW के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच राज्य में लगभग 3200 करोड़ रुपये का शराब घोटाला हुआ। जांच एजेंसी ने इस प्रकरण में आबकारी विभाग के 29 अधिकारियों को आरोपी बनाया। इन पर आरोप है कि सरकारी दुकानों पर “बी-पार्ट शराब” के नाम से अवैध बिक्री कर करोड़ों की कमाई की गई।
जमानत प्रक्रिया
इन अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट ने 18 अगस्त को खारिज कर दी थी। इसके बाद सभी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने 28 अफसरों को शर्तों के साथ राहत प्रदान की।
घोटाले की गंभीरता
जांच में सामने आया है कि 60 लाख से अधिक पेटियां बिना ड्यूटी चुकाई शराब बेची गईं, जिससे हजारों करोड़ की अनियमितता हुई। EOW ने बताया कि डिस्टलरी संचालकों, ट्रांसपोर्टरों, सेल्समैन और आबकारी विभाग के कई अधिकारियों की संलिप्तता रही।
अन्य गिरफ्तारियां
इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, सेवानिवृत्त IAS अनिल टूटेजा और होटल व्यवसायी अनवर ढेबर समेत 15 लोग रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। कुल 70 लोगों को आरोपित बनाया गया है।