इंदौर में दूषित पानी से मौत का मामला: हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब पर जताई नाराजगी, मुख्य सचिव को पेश होने का दिया आदेश…

इंदौर। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों और बड़ी संख्या में बीमार लोगों के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। इस प्रकरण से जुड़ी कुल पांच याचिकाओं पर आज इंदौर हाईकोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार, नगर निगम और जिला प्रशासन के रवैये पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि शासन की ओर से दिया गया जवाब असंवेदनशील है और इस घटना से देशभर में इंदौर शहर की छवि को नुकसान पहुंचा है।

सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों और बीमारियों को लेकर पहले तीन याचिकाएं दायर की गई थीं, जबकि बाद में दो और याचिकाएं दाखिल की गईं। हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए मामले को अत्यंत गंभीर बताया।

स्टेटस रिपोर्ट पर कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छता में देश में अव्वल रहने का दावा करने वाले इंदौर में इस तरह की घटना चिंताजनक है। कोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर भी नाराजगी जाहिर की, खासकर मृतकों की संख्या को लेकर दी गई जानकारी पर सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की रिपोर्ट पेश कर मामले की गंभीरता को कम नहीं किया जा सकता।

क्रिमिनल या सिविल जिम्मेदारी, तय करेगा कोर्ट
हाईकोर्ट ने संकेत दिए कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा। कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यह तय किया जाएगा कि मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का है या इसमें आपराधिक जिम्मेदारी भी बनती है। यानी, दोषियों पर सिविल कार्रवाई होगी या क्रिमिनल लायबिलिटी तय की जाएगी, इसका निर्णय कोर्ट करेगा।

मुख्य सचिव को VC के जरिए पेश होने के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि इस प्रकरण में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही निर्देश दिए कि हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल और समुचित इलाज उपलब्ध कराया जाए।

हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि यह मामला सीधे लोगों की जान से जुड़ा है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भागीरथपुरा की इस घटना के बाद अब पूरा सिस्टम अदालत के दायरे में है। ऐसे में देखना होगा कि आगे सिर्फ सख्त टिप्पणियां होंगी या जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई भी की जाएगी।

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