चार श्रम संहिताओं के विरोध में 1 अप्रैल को ‘काला दिवस’ मनाने का आह्वान

रायपुर/नई दिल्ली। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र फेडरेशनों और विभिन्न श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने 1 अप्रैल 2026 को देशभर में “काला दिवस” मनाने का आह्वान किया है। यह तिथि केंद्र सरकार द्वारा चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन के लिए नियम अधिसूचना से जुड़ी बताई जा रही है, जिसके विरोध में यह कदम उठाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र ने कहा कि ट्रेड यूनियनें इन श्रम संहिताओं का लगातार विरोध कर रही हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने इन्हें “श्रम सुधार” और “Ease of Doing Business” के नाम पर लागू करने की कोशिश की है, जबकि ये प्रावधान श्रमिक हितों के खिलाफ हैं।

उन्होंने बताया कि 12 फरवरी 2026 को हुई देशव्यापी हड़ताल के बाद भी केंद्र सरकार ने न तो इन संहिताओं को वापस लेने पर विचार किया और न ही ट्रेड यूनियनों के साथ कोई सार्थक संवाद किया। महापात्र ने यह भी कहा कि इन संहिताओं के मसौदा तैयार करने के दौरान श्रमिक संगठनों से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया और लंबे समय से भारतीय श्रम सम्मेलन भी नहीं बुलाया गया है।

संयुक्त मंच के अनुसार, नई श्रम संहिताओं में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनसे यूनियन बनाने और पंजीकरण की प्रक्रिया कठिन हो सकती है, जबकि निरस्तीकरण आसान हो जाएगा। इसके अलावा हड़ताल के अधिकार पर भी प्रतिबंध बढ़ने की आशंका जताई गई है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि कार्य समय, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा मानकों से जुड़े कई मुद्दों पर भी इन संहिताओं में स्पष्टता और संतुलन की कमी है।

ट्रेड यूनियनों का यह भी आरोप है कि नई व्यवस्था से फिक्स्ड टर्म रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकार कमजोर हो सकते हैं। उनका कहना है कि यह बदलाव श्रम कानूनों के लंबे संघर्ष से हासिल अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।

इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त मंच ने 1 अप्रैल को देशभर में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की है। इसके तहत कार्यस्थलों पर काले बैज लगाना, काली पट्टी बांधना, लंच अवकाश के दौरान प्रदर्शन, नारेबाजी, धरना, जुलूस या अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से विरोध दर्ज कराने की बात कही गई है।

संगठनों ने समाज के विभिन्न वर्गों से इस कार्यक्रम का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में संगठन बनाने, सामूहिक सौदेबाजी और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना महत्वपूर्ण अधिकार हैं, जिन्हें सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

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