छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी कामयाबी मिली है। लगातार चल रही सघन नक्सल विरोधी कार्रवाइयों और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘नियद नेल्लानार’ तथा प्रभावी पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर एक डीवीसीएम (डिवीजनल कमेटी मेंबर) सहित कुल 52 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।

आत्मसमर्पण करने वालों में 21 महिला और 31 पुरुष माओवादी शामिल हैं। इन सभी पर कुल 1 करोड़ 41 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
कई गंभीर नक्सली वारदातों में थे शामिल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी 52 नक्सली फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट, आगजनी और अन्य गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। इन नक्सलियों ने सीआरपीएफ डीआईजी देवेंद्र सिंह नेगी, बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल और उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया।
आंकड़ों में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार—
- वर्ष 2024 से अब तक 824 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं,
- 1126 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है,
- जबकि अलग-अलग मुठभेड़ों में 223 माओवादी मारे गए हैं।
ये आंकड़े नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों की लगातार बढ़ती सफलता को दर्शाते हैं।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगा पूरा सहयोग
आत्मसमर्पण के बाद राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी नक्सलियों को प्रोत्साहन स्वरूप 50-50 हजार रुपये की नगद सहायता प्रदान की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आगे भी हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि लगातार दबाव, विकास योजनाओं की पहुँच और पुनर्वास नीति के सकारात्मक प्रभाव के चलते नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने को मजबूर हो रहे हैं, जो छत्तीसगढ़ में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।