ऊर्जा संकट के बीच प्रवासी श्रमिकों को बड़ी राहत, सरकार ने 5 किलो एलपीजी सिलेंडर का दैनिक कोटा किया दोगुना

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में उत्पन्न बाधाओं के बीच भारत सरकार ने ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास के तहत सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए बाजार मूल्य वाले 5 किलो एलपीजी सिलेंडरों का दैनिक कोटा दोगुना कर दिया है।

सब्सिडी वाले 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडरों के विपरीत, 5 किलो वाली इन बोतलों की कीमत बाजार दरों पर निर्धारित होती है। वर्तमान में दिल्ली में 5 किलो के सिलेंडर की कीमत 549 रुपये है। ये सिलेंडर बिना पते के प्रमाण के केवल एक साधारण पहचान पत्र दिखाकर सीधे गैस डिस्ट्रीब्यूटरशिप के काउंटर से प्राप्त किए जा सकते हैं।

पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति को देखते हुए सरकार ने घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए भी गैस आवंटन को प्रारंभिक 20 प्रतिशत से बढ़ाकर अब 70 प्रतिशत कर दिया गया है। प्रवासी श्रमिकों के पास नियमित गैस कनेक्शन न होने के कारण उन पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए 5 किलो के सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि 6 अप्रैल को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक राज्य में वितरित होने वाले फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की मात्रा अब दोगुनी होगी। आंकड़ों के अनुसार फरवरी में 77,000 ऐसे सिलेंडर बेचे गए थे, जबकि 23 मार्च से अब तक लगभग 7.8 लाख सिलेंडरों की बिक्री हो चुकी है। अकेले बीते सोमवार को देश भर में 1.06 लाख से अधिक 5 किलो के सिलेंडरों की बिक्री दर्ज की गई।

इसके साथ ही सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के विरुद्ध भी सख्त अभियान छेड़ दिया है। अब तक देश भर में 4,300 से अधिक स्थानों पर छापे मारे जा चुके हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें, क्योंकि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और सभी रिटेल आउटलेट सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं।

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