बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ लफ्जों में कहा है कि किसी कर्मचारी की मौत के बाद अगर उसका परिवार समय पर नौकरी के लिए आवेदन करता है, तो विभाग या बैंक केवल यह बहाना बनाकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि ‘अभी पद खाली नहीं है’। जस्टिस एके प्रसाद की एकलपीठ ने बैंक के इस अड़ियल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पीड़ित को 90 दिनों के भीतर चतुर्थ श्रेणी (क्लास-4) के पद पर नियुक्ति देने का हुक्म जारी किया है।
पिता की मौत के 2 महीने के भीतर किया था आवेदन, बैंक ने सालों अटकाया
यह पूरा मामला ‘संतोष सिन्हा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक’ का है। याचिकाकर्ता संतोष सिन्हा के पिता बैंक में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर तैनात थे। सेवाकाल के दौरान ही अचानक उनकी मृत्यु हो गई थी। पिता की मौत से पूरा परिवार गहरे आर्थिक संकट में डूब गया। इस पर संतोष ने बिना वक्त गंवाए महज दो महीने के भीतर अनुकंपा नियुक्ति के लिए बैंक में आवेदन जमा कर दिया था।
अदालत में याचिकाकर्ता के वकील अनादि शर्मा ने जोरदार पैरवी की। उन्होंने अदालत को बताया कि बैंक ने इस संवेदनशील मामले को सालों तक ठंडे बस्ते में डाले रखा। जब फैसला लिया भी, तो 30 सितंबर 2022 को एक आदेश जारी कर आवेदन यह कहकर खारिज कर दिया कि बैंक में संबंधित पद रिक्त नहीं है। जबकि इसी दौरान समान परिस्थिति वाले अन्य लोगों को नौकरियां दे दी गईं।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: मौत के वक्त ही खाली हो गया था पद
मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एके प्रसाद की एकलपीठ ने बैंक की दलीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “जैसे ही कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हुई, उसी पल वह पद खाली (रिक्त) हो गया था। जब आवेदक ने तय समयसीमा के भीतर आवेदन दे दिया था, तो बाद में रिक्ति उपलब्ध न होने का प्रशासनिक बहाना पूरी तरह से गलत है।”
अदालत ने आगे कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का असली मकसद मृत कर्मचारी के बेसहारा परिवार को तुरंत आर्थिक संबल और राहत देना है। ऐसे मामलों में बैंकों या सरकारी संस्थाओं को तकनीकी कमियां ढूंढने के बजाय संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
बैंक का आदेश निरस्त, आश्रित परिवारों के लिए बनेगा नजीर
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक द्वारा जारी किए गए पुराने खारिज आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। अदालत ने बैंक प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता संतोष सिन्हा को आगामी 90 दिनों के भीतर बैंक में उपलब्ध किसी भी चतुर्थ श्रेणी के पद पर अनिवार्य रूप से अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए। कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला आगे चलकर उन तमाम मामलों में एक बड़ी नजीर साबित होगा, जहां विभाग या कंपनियां तकनीकी बहानों का सहारा लेकर आश्रित परिवारों को उनके हक से वंचित करती आ रही हैं।