चारामा। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से लाखों रुपये की लागत से बनी एक पुलिया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। हैरानी की बात यह है कि इस पुलिया के पिलर (खंभों) की मजबूती के लिए उसमें लोहे के सरिए डालने के बजाय, सीमेंट की खाली बोरियां भरकर ढलाई कर दी गई। निर्माण के कुछ ही महीनों के भीतर पुलिया का पिलर अब धंसने लगा है, जिससे मानसून के दौरान बड़े हादसे की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले को लेकर जनपद पंचायत चारामा की क्षेत्र क्रमांक 04 से जनपद सदस्य और सभापति रेणुका सिन्हा ने कलेक्टर से लिखित शिकायत कर मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

DMF फंड के 16.18 लाख रुपये का गबन!
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकासखंड चारामा के अंतर्गत ग्राम पंचायत किलेपार में नदियापारा से टांहकापार मार्ग पर 300 मीटर स्पान आरसीसी पुलिया का निर्माण कराया गया था। इस कार्य के लिए वर्ष 2024-25 में जिला खनिज न्यास निधि (DMF) से 16.18 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी। इस निर्माण कार्य की मुख्य एजेंसी खुद ग्राम पंचायत किलेपार थी।
दस्तावेजों के मुताबिक, इस पुलिया का निर्माण कार्य 24 अप्रैल 2025 को प्रारंभ हुआ था और यह फरवरी 2026 में पूरी तरह तैयार हो चुका था। लेकिन महज 4 महीनों के भीतर ही इसकी गुणवत्ता की पोल खुलकर सामने आ गई है।
जनपद सदस्य के औचक निरीक्षण में खुला राज
ग्रामीणों से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, दिनांक 10 जून 2026 को जनपद सदस्य रेणुका सिन्हा ने अपनी टीम के साथ मौके पर जाकर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जो तस्वीरें और तथ्य सामने आए, वे बेहद डराने वाले हैं:

पिलर में सरिए की जगह बोरियां: पुलिया को मजबूती देने वाले मुख्य पिलर के भीतर लोहे के सरियों की जगह सीमेंट की खाली बोरियां ठूंसकर कंक्रीट भर दिया गया है। पिलर टूटने पर यह धोखाधड़ी साफ नजर आ रही है।
अभी से धंसने लगा पुल: यद्यपि निर्माण कार्य को पूरा हुए कुछ ही समय हुआ है, लेकिन घटिया निर्माण के कारण पुलिया का पिलर अभी से नीचे की ओर धंसना शुरू हो गया है।
जनपद सदस्य श्रीमती रेणुका सिन्हा ने कहा:
“तकनीकी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की मिलीभगत से शासकीय राशि का खुलेआम गबन किया गया है। यदि मानसून की बारिश से पहले इस पर तत्काल तकनीकी जांच और सुधार नहीं किया गया, तो यह पुल कभी भी ढह सकता है, जिससे जान-माल का बड़ा नुकसान होने की पूरी आशंका है।”
कलेक्टर और जिला पंचायत CEO से कड़ी कार्रवाई की मांग
जनपद सदस्य ने आज, 15 जून 2026 को कलेक्टर कांकेर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत कांकेर और CEO जनपद पंचायत चारामा को आधिकारिक पत्र “किलेपार पुल निर्माण का शिकायत पत्र” और सबूत सौंपकर निम्नलिखित मांगें की हैं:
पुलिया की तुरंत किसी स्वतंत्र विंग से तकनीकी जांच कराई जाए।
दोषी ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित तकनीकी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
शासकीय धन की बर्बादी करने वाले दोषियों से ही पुल के पुनर्निर्माण की पूरी राशि वसूली जाए।
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार के उजागर होने के बाद प्रशासन कितनी जल्दी हरकत में आता है और दोषियों पर क्या गाज गिरती है।