बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद न्याय की घड़ी आई है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र और जेसीसीजे (JCCJ) नेता अमित जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द, अमित जोगी दोषी करार
हाईकोर्ट ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए वर्ष 2007 में आए निचली अदालत के उस फैसले को पूरी तरह पलट दिया है, जिसमें अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक ही गवाही और उन्हीं सबूतों के आधार पर अन्य 28 आरोपियों को सजा देना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी करना कानूनी रूप से गलत था। कोर्ट ने अमित जोगी पर 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे न भरने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के कद्दावर नेता और कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जग्गी को पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल का बेहद करीबी माना जाता था। उस समय छत्तीसगढ़ में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म था। इस हत्याकांड में कुल 31 आरोपी बनाए गए थे। 2007 में विशेष अदालत ने अमित जोगी को छोड़कर अन्य सभी 28 आरोपियों को सजा सुनाई थी, जिसके बाद रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई सुनवाई
लंबे समय तक कानूनी दांव-पेंच में फंसे रहने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को हाईकोर्ट को वापस भेजा था और विस्तृत सुनवाई के निर्देश दिए थे। सीबीआई ने अपनी दलीलों में अमित जोगी को इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया था। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि, सजा के ऐलान के तुरंत बाद अमित जोगी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर दी है, जिस पर जल्द सुनवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
जग्गी हत्याकांड के अन्य दोषी
इस मामले में पहले ही अभय गोयल, याहया ढेबर, फिरोज सिद्दीकी, वीके पांडे, और चिमन सिंह सहित कुल 28 लोग दोषी पाए जा चुके हैं। अमित जोगी की सजा के साथ ही अब इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस के सभी मुख्य किरदारों पर कानूनी शिकंजा कस गया है।