जगदलपुर। बस्तर संभाग में माओवादी संगठन को पूरी तरह समाप्त करने की डेडलाइन अब आखिरी चरण में है। शीर्ष नक्सली लीडरों की मौत और लगातार हो रहे बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण के कारण संगठन कमजोर पड़ चुका है। महासचिव बसवराजू और मोस्ट वांटेड हिड़मा के मारे जाने के बाद भी कुछ सेंट्रल और पोलित ब्यूरो सदस्य साउथ डिविजन में सक्रिय हैं। इन्हें अब अंतिम चेतावनी देते हुए मुख्यधारा में शामिल होने का आग्रह किया गया है।

साउथ डिविजन ही अब माओवाद का अंतिम ठिकाना
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के चार डिवीजन में से अब केवल साउथ डिविजन ही बचा है। इसी डिविजन में सक्रिय माओवादी नेताओं को बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी ने अंतिम ऑफर जारी किया है।
उन्होंने देव जी, पापाराव, गणपति, गणेश उइके, रामधर, संग्राम और बारसे देवा जैसे बचे हुए टॉप लीडरों का नाम लेते हुए स्पष्ट कहा—
“अगर बेहतर जीवन चाहिए, तो यह आखिरी मौका है। जनवरी तक समर्पण करें, वरना परिणाम बेहद गंभीर होंगे।”
समर्पण पर मिलेगा पुनर्वास लाभ
आईजी बस्तर ने कहा कि डेडलाइन के भीतर सरेंडर करने पर सभी को शासन की पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिया जाएगा। सरकार उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने के लिए तैयार है।
जनवरी के बाद सुकमा–बीजापुर में अंतिम बड़ा ऑपरेशन
सुंदरराज ने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में सुकमा और बीजापुर जिलों में निर्णायक और अंतिम बड़ा ऑपरेशन चलाया जाएगा। इसके लिए जवानों को फ्री हैंड दे दिया गया है।
उन्होंने कहा—
“मुख्यधारा में शामिल होना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता है। अन्यथा अंजाम बेहद कठोर होगा।”
बस्तर में माओवाद के सफाए की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर है और सुरक्षा एजेंसियां अंतिम चरण की तैयारी में जुट चुकी हैं।