एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला सुभाष नगर दुर्ग मस्जिद खैरुल अनाम दारुल उलूम में
रमेश गुप्ता
दुर्ग। हज के मुबारक सफर पर जाने वाले दुर्ग-भिलाई के हुज्जाजे इकराम के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला सुभाष नगर दुर्ग मस्जिद खैरूल अनाम दारूल उलूम में रखी गई। इस दौरान मौजूद लोगों को मास्टर प्रशिक्षक हज हाउस नागपुर के इंजीनियर शाहिद ने हज के फ़र्ज़, वाजिबात,सुन्नत और नवाफिल के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि सफर हज के दौरान तमाम जगहों पर दुआओं की खास एहतियात करे। मुजदलफा और मीना पर कयाम (रुकने) की नीयत का करना, सफा और मरवा की सई करना और काबे का तवाफ और एहराम बांधने का सही तरीका उन्होंने बताया।
इस दौरान अपने साथ जरूरी सामान रखना चाहिए। मदीना मुबारक के सफर मे हुजूर के रोज़े पर हाजिरी और जियारत, मदीना में अदब व एहतराम के साथ चलना, दरूद और सलाम पेश करना चाहिए। उन्होंने बताया कि 8 दिन मे 40 नमाज मस्जिद नबवी में पढ़ें। इसका सवाब बहुत है। हजरत मोहम्मद सल्लु अलैहिस्सलाम की हदीस मुबारक है जिसका सारांश यह है कि मक्का मुकर्रमा मे एक नमाज़ का सवाब एक लाख नमाज़ पढ़ने और मस्जिदे नबवी मे एक नमाज़ का सवाब 50 हजार नमाज़ पढ़ने का है। इस दौरान इंजीनियर हाजी शाहिद ने कहा कि हज़ फ़र्ज़ होने पर अदा किया जाता है।
आप सभी की तरफ से नुमाइंदे बनकर जा रहे इसलिए इंसानी पहलू से सभी के लिए खूब अस्तगफार (माफी), उनके हक़ मे दुआएं और खुशहाली व अमन की दुआएं जरूर करें। मास्टर ट्रेनर हाजी शाहिद ने कहा कि काबा के ऊपर पहली नज़र पढते ही जो दुआ मांगो कुबूल हो जाती है इस खास दुआ में अपने व सभी करीबी लोगों के लिए हिदायत, सीधे रास्ते पर चलने, गुनाहों से बचने और इंसानियत के लिए दुआ जरूर करें।