बिना सरकारी आदेश के बस संचालकों की मनमानी: रायपुर से चारामा का किराया 170 से बढ़कर हुआ 210, सामान्य बसों में वसूला जा रहा एसी का किराया

विशेष संवाददाता, जनधारा न्यूज़
रिपोर्टर: अनूप वर्मा
​चारामा/
प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी से कोई इनकार नहीं कर सकता है। ईंधन की कीमतें बढ़ने के बाद स्वाभाविक रूप से बस किराए में वृद्धि होना तय माना जा रहा था, और इसी को लेकर बस यूनियन द्वारा शासन से किराया बढ़ाने की मांग भी की गई थी। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि शासन या परिवहन विभाग द्वारा अब तक बस किराया बढ़ाने को लेकर किसी भी प्रकार का आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
​इसके बावजूद, बस संचालकों ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से सभी रूटों पर किराया बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई बस ऑपरेटरों ने बिना शासन की अनुमति के चुपचाप तरीके से किराए में 30 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है।
​एसी की कोई सुविधा नहीं, फिर भी वसूला जा रहा लग्जरी बसों का किराया
​सड़क पर सफर करने वाले यात्रियों के साथ इस समय दोहरा धोखा हो रहा है। image.png की पड़ताल में भी यह बात सामने आई है कि कई बसों में यात्रियों से ‘एसी (वातानुकूलित) बस’ का किराया वसूला जा रहा है, जबकि वे गाड़ियाँ पूरी तरह से नॉन-एसी (सामान्य) हैं। इन बसों में नाम मात्र का एसी लगा हुआ है जिससे सिर्फ सामान्य हवा आती है, ठंडक या एसी जैसी कोई वास्तविक सुविधा यात्रियों को नहीं मिल रही है। यानी जो किराया और सुविधाएं लग्जरी बसों के लिए तय होती हैं, वही भारी-भरकम किराया अब सामान्य (नॉन-एसी) बसों में सफर करने वाले मजबूर यात्रियों से जबरन वसूला जा रहा है।
​दूरी वही, पर जेब पर डाका: रायपुर-चारामा रूट का उदाहरण
​बस संचालकों की इस मनमानी का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। उदाहरण के लिए, रायपुर से चारामा की दूरी लगभग 110 किलोमीटर है। इस सफर के लिए पहले यात्रियों से ₹170 का किराया लिया जाता था, लेकिन अब बिना किसी सरकारी आदेश के यात्रियों से सीधे ₹210 वसूले जा रहे हैं। इसी तरह प्रदेश के लगभग सभी छोटे-बड़े रूटों पर अवैध रूप से किराया बढ़ा दिया गया है। लंबे रूटों जैसे रायपुर से बैलाडीला का किराया पहले ₹800 था जिसे सीधे ₹1200 कर दिया गया है, और जगदलपुर का किराया ₹650 की जगह ₹800 वसूला जा रहा है।
​लिखित आदेश न होने से कंडक्टरों से रोज़ बढ़ रही बहस
​चूंकि सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक अधिसूचना या नई रेट लिस्ट जारी नहीं की गई है, इसलिए बसों में सफर करने वाले जागरूक यात्री पुराने तय किराए की ही मांग कर रहे हैं। गाड़ी में किसी भी प्रकार का लिखित सरकारी आदेश न होने के कारण बसों के भीतर यात्रियों और कंडक्टरों के बीच हर दिन तीखी बहस और विवाद बढ़ रहा है। यात्री इसे खुली लूट कह रहे हैं, वहीं कंडक्टर ईंधन और स्पेयर पार्ट्स की बढ़ी कीमतों का हवाला देकर जबरन बढ़ा हुआ किराया वसूलने पर अड़े हुए हैं।
​परिवहन विभाग के अफसरों का कहना है कि उन्होंने ऑपरेटरों को पूर्व में तय किराया ही लेने के निर्देश दिए हैं और शिकायत मिलने पर जांच की बात कही है, लेकिन धरातल पर जब तक सरकार सख्त कार्रवाई नहीं करती, यात्रियों को इस मनमानी और विवाद से राहत मिलती नहीं दिख रही है।

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