नई दिल्ली: अक्सर लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट के बाद करोड़ों रुपये का फंड बनाने के लिए मोटी सैलरी होना जरूरी है। लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही समय पर लिया गया छोटा सा फैसला भी बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना सकता है। अगर आप भी रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹1 लाख की नियमित आय (पेंशन) चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड की SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) और SWP (सिस्टमैटिक विदड्रॉल प्लान) का तगड़ा कॉम्बिनेशन आपके बेहद काम आ सकता है।
कंपाउंडिंग का जादू: ₹1,000 की SIP से खड़ा होगा ₹1 करोड़ से बड़ा फंड
मान लीजिए कि कोई 28 साल का युवा हर महीने सिर्फ ₹1,000 की SIP से निवेश की शुरुआत करता है। अगर वह हर साल अपनी निवेश राशि में 10% का टॉप-अप (बढ़ोतरी) करता है और 60 साल की उम्र (यानी अगले 32 साल) तक इसे जारी रखता है, तो 12% के अनुमानित सालाना रिटर्न के हिसाब से रिटायरमेंट के वक्त उसके पास ₹1.05 करोड़ का बड़ा फंड तैयार हो सकता है।
इस पूरे सफर में निवेशक की जेब से कुल ₹24.13 लाख जमा होंगे, जबकि कंपाउंडिंग की ताकत से उसे करीब ₹80.98 लाख का केवल वेल्थ गेन (मुनाफा) मिलेगा।
हर साल निवेश बढ़ाना क्यों है गेम-चेंजर?
इस पूरे फॉर्मूले की सबसे जरूरी कड़ी है—हर साल निवेश की रकम को बढ़ाना। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी हर साल इंक्रीमेंट या प्रमोशन के साथ बढ़ती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि आप अपनी बढ़ती कमाई के साथ SIP की रकम भी 10% बढ़ा देते हैं, तो बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के आप आसानी से करोड़ों का फंड तैयार कर लेते हैं।
SWP से घर आएगी हर महीने ₹1 लाख की ‘पेंशन’
एक बार जब आपका रिटायरमेंट फंड तैयार हो जाता है, तो वहां से हर महीने बंधी-बंधाई रकम पाने के लिए SWP काम आता है। इसके तहत आपका मूल पैसा म्यूचुअल फंड में ही निवेशित रहता है और उस पर रिटर्न मिलता रहता है, जबकि आप अपनी जरूरत के मुताबिक हर महीने एक तय राशि निकाल सकते हैं।
उदाहरण: यदि आपके पास ₹1.5 करोड़ का कुल कॉर्पस है और आप उसे किसी सुरक्षित हाइब्रिड या डेट ओरिएंटेड फंड में डाल देते हैं, जहाँ सालाना कम से कम 6% का भी रिटर्न मिले, तो आप अगले 12 सालों तक बिना किसी चिंता के हर महीने ₹1 लाख की नियमित निकासी (SWP) कर सकते हैं।
जरूरी बात: ध्यान रहे कि म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं। यहां बताए गए 12% और 6% के रिटर्न केवल अनुमानित गणना पर आधारित हैं, इनकी कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए अपनी उम्र और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से ही निवेश की योजना बनाएं।