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Aajkijandhara प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा की कलम से क्या कांग्रेस को नई दिशा देगी खडग़े की स्टीयरिंग कमेटी!

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Aajkijandhara प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा की कलम से क्या कांग्रेस को नई दिशा देगी खडग़े की स्टीयरिंग कमेटी!

Aajkijandhara  प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा की कलम से क्या कांग्रेस को नई दिशा देगी खडग़े की स्टीयरिंग कमेटी!

Aajkijandhara  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते ही मल्लिका अर्जुन खडग़े ने अपनी नई टीम बनाई है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी की जगह पर उन्होंने 47 सदस्यों की स्टीयरिंग कमेटी का ऐलान किया। खडग़े कर्नाटक से आते हैं और रेल मंत्री भी रह चुके हैं। संगठन के तौर पर देखें तो खडग़े गांधी परिवार के विश्वास पात्र नेताओं में शुमार हैं। उनके द्वारा बनाई गई स्टीयरिंग कमेटी में भी राहुल गांधी की पंसद का ख्याल रखा गया है।

स्टीयरिंग कमेटी में पार्टी के कई बड़े चेहरों को जगह दी है। इस लिस्ट में आनंद शर्मा, रणदीप सुरजेवाला, अजय माकन, अभिषेक मनु सिंघवी, अंबिका सोनी, जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, सलमान खुर्शीद, राजीव शुक्ला, हरीश रावत को भी शामिल किया है। इस कमेटी में शशि थरूर को जगह नहीं मिली है। पार्टी में अब सभी अहम फैसलों पर इसी कमेटी की मुहर लगेगी। खास बात ये है कि उन्होंने पार्टी के तमाम अहम पदों पर 50 साल से कम उम्र के नेताओं को जगह देने की बात कही है।

Aajkijandhara  80 साल के मल्लिका अर्जुन खडग़े कांग्रेस के वफादार और जीवट नेता हैं। उम्र के इस पड़ाव में उनकी जो जिम्मेदारी है वो बहुत बड़ी है, हालांकि अपने शुरुआती फैसलों से वे अपना रुख साफ कर दिया है कि वे पार्टी के पुराने नेताओं को तो साथ में लेकर चलेंगे लेकिन युवाओं पर भी वे भरोसा जताएंगे।

Aajkijandhara इसके बाद भी खडग़े सामने बाहरी चुनौती के अलावा खुद की पार्टी के भीतर सामंजस्य बैठान बड़ी चुनौती होगी। अब ये भविष्य ही तय करेगा की पार्टी के बाहर औऱ भीतर की चुनौती से वे कैसे डील करते हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या कांग्रेस को चुनावी रण पर खडग़े के होने से लाभ मिलेगा। खडग़े दलित समुदाय से आते हैं। इसका लाभ उठाने की कोशिश पार्टी अवश्य करेगी लेकिन पंजाब में चन्नी वाला दांव फैल होने के बाद कहना मुश्किल है कि खडग़े अपने नाम पर कांग्रेस का वोट बैंक समृद्ध कर देंगे।

Aajkijandhara वैसे कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही है कि वहां अध्यक्ष से बड़ा कोई न कोई नेता होता रहा है, हालांकि सोनिया गांधी की इंट्री के बाद ये समीकरण बदल गया था। शायद वह दौर फिर से लौटते हुए हम देखें। खडग़े के अध्यक्ष होने के बाद भी कांग्रेस चुनावी मैदान पर राहुल या प्रियंका गांधी के चेहरे पर दांव लगाए।

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