चारामा विकासखंड के महानदी से गुजरी नदी में लगातार हो रहे अवैध रेत खनन से आम जन लगातार परेशान नजर आ रही हैं, रेत खनन से लगातार पर्यावरण सड़क और सडक पर उड़ती धूल से लोगों की सेहत पर असर पड ही रहा हैं. वहीं अब रेत माफिया रेत के लगातार खनन के लिए नदियों में आमजन की जरूरत के लिए बनाए गए एनीकट के पानी को रातों रातों खोलकर रेत उत्खनन कर रहे हैं, जो कहीं ना कहीं पानी के लेवल को गिराने के साथ-साथ आमजन और पशु पक्षियों के निस्तारि के कार्य को भी प्रभावित कर रहा हैं। शुक्रवार को दुधावा डेम से आमं जन के निस्तारी और पशु पक्षियों के हित को धयान में रखकर महानदी में पानी छोड़ा गया था

, जो की हराडुला एनीकट में शाम तक पहुंच गया था, और एनीकत का गेट बंद होने के कारण पानी एनीकट पर लबालब भरा हुआ था,लेकिन सुबह होते तक पूरा पूरा नदी का पानी खाली हो गया था, रातों रात पानी एनीकट से खाली करा दिया गया, अब ये कैसे हुआ, यह समझ से परे हैं, क्योंकि एनीकट का कण्ट्रोल सिचाई विभाग के पास होता हैं,तो एनीकट का गेट रातों रात कैसे खुल जाता हैं, इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिकारी कर्मचारियों से पूछने पर उन्होंने बताया कि बुधवार को हराडुला और अन्य गांव के लोग खेत की सिचाई और अन्य निस्तारी के लिए नदी में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर चारामा सिचाई विभाग कार्यालय आये थे
,जिसके बाद ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए तत्काल महानदी में पानी छोड़ा गया था, लेकिन शनिवार को सुबह विभाग को पता चला की एनी कट का गेट किसी अज्ञात व्यक्ति के द्वारा खोल दिया गया, जिससे एनीकट में भरा पानी खाली हो गया, जबकि पूर्व में एनीकेट के टूटे हुए दरवाजा की मरम्मत करवाई गई थी, ताकि ग्रामीणों को पानी का लाभ मिल सके, एनीकेट का गेट किसके द्वारा खोला जा रहा है जिसकी जांच की जा रही है

और जल्द दोषी के ऊपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में ग्राम के सरपंच से पूछने पर उन्होंने बताया की ग्रामीणों की मांग पर ही नदी में पानी छोड़ा गया था लेकिन कुछ व्यक्तियों के द्वारा रेत के अवैध उत्खनन के निजी स्वार्थ को लेकर एनिकट का गेट रातों-रात खोला गया, इसकी जानकारी मुझे भी मिली, मुझे जानकारी मिलने के बाद मैं इस पूरी घटना की जानकारी सिंचाई विभाग और हल्बा चौकी में दी हैं। यानी यह तो स्पष्ट है कि ग्राम के ही किसी व्यक्ति के द्वारा रेत माफिया के साथ मिलकर एनीकट की डुप्लीकेट चाबी बनाई गई है, जिससे वह एनीकट के दरवाजे खोलकर पानी बाहर निकाल देता है,जिस पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। विदित हो की
ग्राम हराडुला और सरधुनगांव के बीच में बने महानदी पर पुल जो की लगातार रेत की ओवरलोड गाड़ियों के चलते बीते एक साल पहले टूट गया था, जो की अब तक बनना शुरू तक नहीं हुआ हैं. पुल टूट जाने के बाद से लगातार आमजन को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें नेशनल हायवे की दूरी तय करने के लिए 02 किलो मीटर की बजाय 08 किलोमीटर का सफर तय करना पड रहा हैं, आमं जन और ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन रेत माफिया मजे कर रहे हैं, और रेत माफिया के पास यह हिम्मत सफेद पोस नेताओं के संरक्षण से आ रही है।

रेत माफिया को ना ही पर्यावरण और न ही गिरते वाटर लेवल और न ही आम जन के निस्तारी की चिंता हैं. मैं तो बस अवैध रेत की लूट में लगे हुए हैं। जिसका कामयाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। वही ग्रामीणों ने यह भी बताया की लगातार रेत की उत्खनन और नदी में पानी नहीं रह पाने के कारण महानदी के आसपास के गांव के का वाटर लेवल डाउन हो रहा है. अप्रैल में ही बोर की धार पतली हो चुकी है, मई जून तक यह स्थिति गंभीर हो जाएगी। ग्रामीणों ने अवैध रेत उत्खनन को जल्द से जल्द बंद करने की मांग भी प्रशासन से की है.