नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल से जुड़े विवाद को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुए व्यवहार ने न केवल उनके पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि यह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अपमान है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल की जनता जल्द ही टीएमसी सरकार के अहंकार को जवाब देगी। उन्होंने कहा कि “दीदी को इस बार बंगाल से जाना ही होगा।”
राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बहिष्कार का आरोप
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल आदिवासी परंपरा से जुड़े एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होने पश्चिम बंगाल गई थीं, लेकिन राज्य सरकार और TMC के नेताओं ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। उनके अनुसार यह केवल राष्ट्रपति का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज और देश के संविधान का भी अपमान है।
गृह मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट
इस पूरे मामले पर केंद्र सरकार ने भी संज्ञान लिया है। गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय गृह सचिव ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर प्रोटोकॉल व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं में हुई चूक को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
अमित शाह ने भी जताई नाराजगी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि यह राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि टीएमसी सरकार का यह व्यवहार अराजकता को दर्शाता है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
क्या है पूरा विवाद
दरअसल राष्ट्रपति मुर्मू उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग जिले में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंची थीं। कार्यक्रम पहले फांसीदेवा ब्लॉक के बिधाननगर में प्रस्तावित था, लेकिन बाद में प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़भाड़ का हवाला देते हुए इसे बागडोगरा के पास गोसाईंपुर में स्थानांतरित कर दिया।
बताया गया कि नए स्थान की क्षमता कम होने के कारण बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। राष्ट्रपति ने भी इस बदलाव पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि कई लोग कार्यक्रम तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘छोटी बहन’ बताते हुए यह भी सवाल किया था कि क्या वे उनसे नाराज हैं, क्योंकि न तो मुख्यमंत्री और न ही राज्य सरकार का कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचा।