महिला दिवस पर विशेष: सेवा और संवेदना की मिसाल – बुलबुल वैद्य

कांकेर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हमें उन महिलाओं के योगदान को याद करने और सम्मान देने का अवसर देता है, जिन्होंने अपने साहस, संवेदनशीलता और समर्पण से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। ऐसी ही प्रेरणादायक महिला हैं बुलबुल वैद्य, जिन्होंने एक बुजुर्ग की पीड़ा को देखकर वृद्धाश्रम की स्थापना का संकल्प लिया और आज वह समाज सेवा की एक मिसाल बन चुकी हैं।

कांकेर शहर में सामाजिक संस्था “बुलबुल शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान” वर्ष 2008 से वृद्धाश्रम का संचालन कर रहा है। इस वृद्धाश्रम में वे बुजुर्ग रहते हैं जिनके पास रहने के लिए कोई सहारा नहीं है या जिनके अपने ही उन्हें अपने साथ नहीं रखना चाहते। वर्तमान में यहाँ 11 बुजुर्ग माता-पिता रह रहे हैं, जिनकी देखभाल संस्था द्वारा परिवार की तरह की जाती है।

बुलबुल वैद्य ने पहले महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम शुरू किया था। इसी दौरान उन्हें सड़क किनारे एक बुजुर्ग महिला की दयनीय स्थिति दिखाई दी। उस दृश्य ने उनके मन को गहराई से झकझोर दिया और उन्होंने ऐसे बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित आश्रय बनाने का निर्णय लिया। शुरुआत में संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और जनसहयोग से वृद्धाश्रम की शुरुआत की।

पिछले 16 वर्षों से यह संस्था बुजुर्गों को भोजन, दवाई, देखभाल और सम्मानजनक जीवन देने का कार्य कर रही है। संस्था की पहल और समाज के सहयोग से अब वृद्धाश्रम के लिए जमीन भी उपलब्ध कराई गई है, जहाँ एक बड़ा और सुविधायुक्त भवन निर्माणाधीन है। इससे भविष्य में अधिक बुजुर्गों को आश्रय मिल सकेगा।

महिला दिवस के अवसर पर बुलबुल वैद्य की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह संदेश देती है कि संवेदना, सेवा और दृढ़ संकल्प से कोई भी व्यक्ति समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। वास्तव में ऐसी महिलाएँ ही समाज की सच्ची शक्ति हैं, जो अपने प्रयासों से मानवता की मिसाल कायम करती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *