चारामा
रंगों, खुशियों और भाईचारे का महापर्व होली चारामा क्षेत्र में भी पूरे उत्साह, उमंग और परंपरागत तरीके से मनाया जा रहा है। सुबह से ही शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक ‘होली है!’, ‘बुरा न मानो होली है!’ की गूंज सुनाई दे रही है, जहां बच्चे पिचकारियों और गुब्बारों से एक-दूसरे को भिगोते दिखे, वहीं बड़े-बुजुर्ग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर प्रेम और सौहार्द की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

02 मार्च को देर रात होलिका दहन के बाद 04 मार्च को होली का पर्व मनाया गया।
यह त्योहार सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का भी प्रतीक है। क्षेत्र की विविधता भरी संस्कृति में, होली सभी वर्गों और समुदायों के लोगों को एक साथ लाती है। लोग अपनी जाति, धर्म और सामाजिक स्थिति को भूलकर एक-दूसरे पर रंग डालते हैं,
होली के पर्व पर शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने भी कड़ी मेहनत की है ।और पूरा पर्व शान्ति ठंग से मनाया गया।सुबह से देर रात तक लोग गीत संगीत मे नाचते गाते रंग ग़ुलाल खेलते नज़र आये।