दिशा और डीएमएफ बैठक में दिखा सांसद रूपकुमारी चौधरी का रौद्र रूप

डीएमएफ बैठक में भ्रामक जानकारी देने पर कलेक्टर को लगी फटकार

गरियाबंद। होली से पहले जिला पंचायत कार्यालय में सोमवार को आयोजित दिशा की मैराथन बैठक का नजारा किसी दीपावली के धमाके से कम नहीं रहा। समीक्षा के दौरान एक के बाद एक सवालों के “पटाखे” फूटते रहे और लापरवाही के आरोपों से प्रशासनिक अमला असहज नजर आया। बैठक की अध्यक्षता कर रहीं महासमुंद लोकसभा की सांसद रूपकुमारी चौधरी ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कई विभागों की जवाबदेही तय करने के संकेत दिए।

जिला पंचायत सभाकक्ष में राजिम विधायक रोहित साहू सहित जिले के अन्य प्रतिनिधियों की मौजूदगी में करीब छह घंटे चली इस बैठक में श्रम, शिक्षा, समग्र शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अन्य अहम विभागों की प्रगति रिपोर्ट पर बारीकी से चर्चा हुई। सांसद ने आंकड़ों और जमीनी हकीकत में अंतर पर सवाल उठाए और कहा कि कागजों में प्रगति दिखाकर जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। भ्रामक जानकारी देने से नाराज सांसद ने जिला प्रशासन को दो टूक कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही और आमजन की समस्याओं के समाधान में देरी किसी भी स्थिति में बर्दास्त नहीं होगी।

डीएमएफ बैठक में कलेक्टर को लगी फटकार

दिशा बैठक के बाद जब जिला खनिज न्यास समिति (डीएमएफ) की बैठक में मामला और गरमा गया। सांसद रूप कुमारी चौधरी ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी और अनुमोदन के बिना 80 प्रतिशत राशि के उपयोग को मंजूरी दे दी गई। इसे लेकर उन्होंने कलेक्टर बीएस उइके को कड़ी फटकार भी लगाई। सांसद ने आरोप लगाया कि डीएमएफ मद की करोड़ों की राशि को पारदर्शिता से खर्च नहीं किया गया, बल्कि जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से कार्य स्वीकृत और संपादित किए गए।

सूत्रों के मुताबिक डीएमएफ राशि के व्यय और स्वीकृत कार्यों की समीक्षा के दौरान जिला कलेक्टर द्वारा लगातार तथ्यहीन और भ्रमित करने वाली जानकारी प्रस्तुत की गई। सांसद ने बीच में ही टोकते हुए आरोप लगाया कि समिति के सामने प्रस्तुत आंकड़ों और जमीनी हकीकत में गंभीर अंतर है। जनप्रतिनिधियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराने के बजाय उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। भ्रामक जानकारी से नाराज सांसद बैठक के दौरान ही नाराज होकर बाहर निकल गईं।

डीएमएफ निधि के गलत उपयोग पर जिला प्रशासन जिम्मेदार

इस दौरान सांसद ने कहा कि डीएमएफ की राशि खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए होती है, लेकिन जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों को दरकिनार मनमाने ढंग से खर्च कर दिया। उन्होंने विशेष रूप से बोर खनन कार्य, पानी टैंकर वितरण, हाई मास्क लाइट स्थापना और जनरेटर क्रय
जैसे कार्यों में व्यय पर आपत्ति जताई। इसके अलावा स्कूल जतन योजना में डीएमएफ निधि के राशि में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी सांसद ने तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्कूल जतन योजना से लेकर डीएमएफ राशि तक में गंभीर अनियमितताएँ दिखाई दे रही हैं और यह मात्र प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित गड़बड़ी का संकेत है। उन्होंने कहा कि यदि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। साथ ही संकेत भी दिए कि यदि व्यय में अनियमितताएँ सामने आती हैं तो इसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी जिला कलेक्टर पर तय होगी। इस दौरान बैठक कक्ष में मौजूद अधिकारियों के चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दिया। बताया गया कि तीखी नाराजगी के बीच सांसद ने उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर तक नहीं किए और बैठक कक्ष से बाहर निकल गईं। जाते तक कलेक्टर उन्हे मानते नजर आए।

जल उपभोक्ता समिति की बैठक रद्द

इधर, दिशा और डीएमएफ की तल्खी के बाद प्रस्तावित जल उपभोक्ता समिति की बैठक भी रद्द कर दी गई। सांसद ने दो टूक कहा कि जब तक प्रशासन अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं करता, तब तक आगे की बैठकें आयोजित नहीं की जाएंगी। बैठक का यह तीखा तेवर जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। होली से पहले फूटे फटाखे ने साफ संकेत दे दिया है कि प्रशासनिक भर्राशाही और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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