रायपुर। छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटों पर चुनावी प्रक्रिया शुरू होते ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचना जारी होते ही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इन चुनावों को केवल ऊपरी सदन की सदस्यता तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे 2028 के विधानसभा चुनावों की तैयारी और राष्ट्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ की भूमिका से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
कौन-कौन सी सीटें हो रही हैं खाली
अप्रैल में दो राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है —
- के टी एस तुलसी
- फूलो देवी नेताम
पिछले चुनाव में ये दोनों सीटें कांग्रेस के खाते में थीं, लेकिन बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के चलते इस बार तस्वीर अलग नजर आ रही है।
भाजपा का पलड़ा भारी, पर दूसरी सीट पर रोमांच
छत्तीसगढ़ विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक हैं। इस संख्या बल के आधार पर एक सीट पर उसका कब्जा लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी ने संभावित उम्मीदवारों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है, जिसमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
- कमलचंद्र भंजदेव
- लक्ष्मी वर्मा
- प्रबल प्रताप सिंह
- सौरभ सिंह
सूत्रों का कहना है कि अंतिम सूची में कोई “चौंकाने वाला नया चेहरा” भी शामिल हो सकता है। भाजपा हाईकमान अंतिम फैसला लेगा, जिससे अटकलों का दौर जारी है। दूसरी सीट पर मुकाबला रोचक हो सकता है। यहां कांग्रेस पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक समर्थन की चर्चाएं भी तेज हैं।

कांग्रेस में आदिवासी प्रतिनिधित्व का मुद्दा
कांग्रेस के भीतर से जोरदार मांग उठ रही है कि राज्यसभा के लिए एक आदिवासी चेहरा आगे लाया जाए। फूलो देवी नेताम के कार्यकाल समाप्त होने के बाद बस्तर क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आदिवासी प्रतिनिधित्व छत्तीसगढ़ की राजनीति का संवेदनशील और निर्णायक मुद्दा रहा है। ऐसे में कांग्रेस इस भावनात्मक और सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश में है।
चुनाव कार्यक्रम: 16 मार्च को मतदान
राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए निर्वाचन कार्यक्रम इस प्रकार है:
- 26 फरवरी 2026 – अधिसूचना जारी
- 5 मार्च 2026 – नामांकन की अंतिम तिथि
- 6 मार्च 2026 – नामांकन पत्रों की संवीक्षा
- 9 मार्च 2026 – नाम वापसी की अंतिम तिथि
- 16 मार्च 2026 – सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान
- 16 मार्च 2026 – शाम 5 बजे से मतगणना
- 20 मार्च 2026 – निर्वाचन प्रक्रिया पूर्ण
देश के 10 राज्यों की 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ की दो सीटें भी शामिल हैं।
राजनीतिक संदेश और दूरगामी प्रभाव
राज्यसभा सदस्यता केवल संसद की औपचारिक भूमिका नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की राष्ट्रीय पहचान और प्रभाव का माध्यम भी है।
- भाजपा के लिए यह अपनी संगठनात्मक शक्ति और स्थिर बहुमत का प्रदर्शन है।
- कांग्रेस के लिए यह संगठन को एकजुट रखने और सामाजिक संतुलन साधने की चुनौती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव 2028 के विधानसभा चुनावों की “सेमीफाइनल” की तरह भी देखा जा सकता है। लॉबिंग, रणनीतिक बैठकों और दिल्ली तक पहुंच की होड़ तेज हो चुकी है।
एक सीट पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन दूसरी सीट पर समीकरण अंतिम क्षण तक बदल सकते हैं। उम्मीदवारों की अंतिम घोषणा के साथ ही राजनीतिक तापमान और बढ़ेगा। छत्तीसगढ़ की राजनीति इस समय निर्णायक मोड़ पर खड़ी है जहां संख्या बल, सामाजिक प्रतिनिधित्व और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति मिलकर भविष्य की दिशा तय करेंगे। राज्यसभा की यह जंग केवल दो सीटों की नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव, सामाजिक संतुलन और आने वाले चुनावी संदेश की भी है।