Holika Dahan 2026 : नई दिल्ली : फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाने वाला होलिका दहन का पर्व इस साल (2026) ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और थोड़ा जटिल हो गया है। आज यानी 2 मार्च से पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो रहा है, जो 3 मार्च तक चलेगी। हालांकि, इस बार तिथि के साथ भद्रा का वास और साल के पहले चंद्र ग्रहण का संयोग बनने के कारण लोगों में पूजन के समय को लेकर काफी असमंजस की स्थिति है। विद्वानों के अनुसार, ग्रहण और भद्राकाल में शुभ कार्यों की मनाही होती है, इसलिए होलिका दहन के लिए सटीक समय का ज्ञान होना आवश्यक है।
कब से कब तक रहेगी पूर्णिमा तिथि?
नई दिल्ली: हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत आज, 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन, 3 मार्च को शाम 5 बजकर 9 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में प्रदोष काल के दौरान किया जाता है, लेकिन इसमें भद्रा का मुख त्यागना अनिवार्य होता है।
भद्रा का साया और उसका प्रभाव
नई दिल्ली: इस वर्ष होलिका दहन पर भद्रा का भारी साया मंडरा रहा है। पंचांग के अनुसार, भद्रा का आरंभ आज 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट (पूर्णिमा तिथि के साथ ही) हो जाएगा, जो अगले दिन 3 मार्च को सुबह 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को अशुभ माना गया है, विशेषकर भद्रा के दौरान होलिका दहन करना वर्जित है। इस बार भद्रा का वास भूलोक और सिंह राशि में माना जा रहा है। हालांकि, इस अवधि में दान-पुण्य करना फलदायी रहेगा।
चंद्र ग्रहण का संयोग और सावधानी
नई दिल्ली: 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। ग्रहण के सूतक काल और प्रभाव के कारण धार्मिक अनुष्ठानों के समय में बदलाव आता है। चूंकि ग्रहण और भद्रा दोनों का प्रभाव इस बार पर्व के आड़े आ रहा है, इसलिए भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे भद्रा काल के समाप्त होने के पश्चात और ग्रहण के नियमों को ध्यान में रखकर ही होलिका पूजन संपन्न करें।