नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच छिड़े सीधे संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में हड़कंप मचा दिया है। इस युद्ध का सबसे बड़ा और तात्कालिक असर बुलियन मार्केट यानी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ने की पूरी संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार को बाजार खुलते ही कीमती धातुओं की कीमतें ‘रॉकेट’ की रफ्तार से भाग सकती हैं, जिससे निवेश के पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त हो सकते हैं।
सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे निवेशक
जियो-पॉलिटिकल तनाव (भू-राजनीतिक तनाव) के समय निवेशक अक्सर शेयर बाजार के जोखिम से बचकर सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते हैं। एमिरेट्स इन्वेस्टमेंट बैंक के निदेशक धर्मेश भाटिया के अनुसार, युद्ध की शुरुआत ने तकनीकी चार्ट्स के समीकरण बदल दिए हैं। शुक्रवार को केवल युद्ध की आहट मात्र से कीमतों में उछाल आ गया था, लेकिन अब वास्तविक संघर्ष शुरू होने के बाद सोमवार को बाजार में ऐतिहासिक तेजी देखने को मिल सकती है।
सोने-चांदी की मौजूदा स्थिति और बढ़त के आंकड़े
युद्ध की खबरों के बीच पिछले कारोबारी सत्र (शुक्रवार) में ही बाजार के तेवर कड़े नजर आए थे:
चांदी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 6.19% उछलकर 93.84 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। वहीं भारतीय बाजार (MCX) पर यह 5% से अधिक की तेजी के साथ 2.74 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को छू गई।
सोना: वैश्विक स्तर पर सोना 5,277 डॉलर प्रति औंस और MCX पर 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल की कीमतों में भी लग सकती है ‘आग’
विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोमवार को न केवल सोना-चांदी, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों में भी 5 से 7 फीसदी का बड़ा जंप देखने को मिल सकता है। यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी आम जनता की जेब पर बोझ डाल सकती है।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की सलाह
बाजार की इस उठा-पटक के बीच विशेषज्ञों ने निवेशकों को ‘पैनिक सेलिंग’ (घबराहट में बिकवाली) न करने की सलाह दी है। वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए पोर्टफोलियो में विविधता (Diversification) लाना जरूरी है। जोखिम कम करने के लिए सोने-चांदी में निवेश एक बेहतर विकल्प हो सकता है, बशर्ते निवेश लंबी अवधि के नजरिए से किया जाए।