हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारत की 444 इंटरनेशनल फ्लाइट्स रद्द, लाखों यात्री परेशान

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच भारतीय विमानन क्षेत्र को अब तक के सबसे बड़े व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद उपजे तनाव के कारण ईरान समेत 11 देशों ने अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) पूरी तरह बंद कर दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर भारत की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है, जिसके चलते रविवार, 1 मार्च 2026 को देश भर में 444 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।

मध्य पूर्व के तनाव से हवाई यातायात ठप

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कई देशों में हवाई मार्ग प्रतिबंधित होने से भारतीय एयरलाइंस का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे पहले 28 फरवरी को भी लगभग 410 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं। हवाई क्षेत्र बंद होने से न केवल उड़ानें रद्द हो रही हैं, बल्कि जो उड़ानें संचालित हो रही हैं, उन्हें लंबे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे यात्रा समय और ईंधन की लागत में भारी वृद्धि हुई है।

यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें और डीजीसीए का अलर्ट

उड़ानों के अचानक रद्द होने से लाखों यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए हैं। हालांकि एयरलाइंस यात्रियों को रीशेड्यूलिंग और रिफंड के विकल्प दे रही हैं, लेकिन शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। ‘एयरसेवा’ पोर्टल पर अकेले 28 फरवरी को 216 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 105 का त्वरित समाधान किया गया है।

डीजीसीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से जानकारी दी है कि प्रमुख हवाई अड्डों को ‘ऑपरेशनल अलर्ट’ पर रखा गया है ताकि मार्ग परिवर्तन (Divert) होकर आने वाली उड़ानों और यात्रियों की सुविधाओं का प्रबंधन किया जा सके।

सुरक्षा सर्वोपरि: मंत्रालय की कड़ी निगरानी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि वे वैश्विक सुरक्षा प्रोटोकॉल और आकस्मिक योजना के तहत उड़ानों का पुनर्निर्देशन सुनिश्चित करें। भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) और निजी हवाई अड्डा संचालकों को ग्राउंड हैंडलिंग, पार्किंग और आव्रजन सहायता के लिए एयरलाइंस के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की सलाह दी गई है। फिलहाल स्थिति पर निरंतर नज़र रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

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